भोपाल, मार्च 2026 — मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी से जुड़े लगभग 24 वर्ष पुराने “दो बच्चों के नियम” को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है, जिसे मुख्यमंत्री स्तर पर सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। अब इस प्रस्ताव को शीघ्र ही मंत्रि-परिषद के समक्ष अंतिम निर्णय के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद तीन या उससे अधिक बच्चों वाले व्यक्तियों को न तो सरकारी नौकरी से वंचित किया जाएगा और न ही उन्हें सेवा में बने रहने से रोका जाएगा। वर्तमान में यह नियम कई कर्मचारियों और अभ्यर्थियों के लिए बाधा बना हुआ था।उल्लेखनीय है कि वर्ष 2001 में तत्कालीन सरकार द्वारा सिविल सेवा नियमों में संशोधन कर यह प्रावधान लागू किया गया था, जिसके तहत दो से अधिक संतान होने पर व्यक्ति को सरकारी सेवा के लिए अयोग्य माना जाता था। इस कारण कई कर्मचारियों की नियुक्ति रुकी या उनकी सेवा प्रभावित हुई।बदलाव का सबसे अधिक लाभ शिक्षा क्षेत्र को मिलने की संभावना है। जानकारी के अनुसार, बड़ी संख्या में शिक्षक इस नियम से प्रभावित थे। नए प्रावधान लागू होने के बाद उनकी सेवाएं सुरक्षित हो सकेंगी। इसके अतिरिक्त स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में भी लंबे समय से लंबित हजारों प्रकरणों के निराकरण का मार्ग प्रशस्त होगा।राज्य सरकार ऐसे कर्मचारियों को भी राहत देने पर विचार कर रही है, जिन्हें तीसरी संतान के कारण सेवा से हटाया गया था या जिनके मामले न्यायालय में लंबित हैं। मंत्रि-परिषद इन सभी पहलुओं पर व्यापक विचार-विमर्श के बाद अंतिम निर्णय लेगी।पिछले कुछ वर्षों में इस नियम को लेकर व्यापक बहस होती रही है। कई विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता के विरुद्ध बताया, वहीं बदलते सामाजिक एवं पारिवारिक परिदृश्य के अनुरूप इसे अप्रासंगिक माना गया।सरकार द्वारा इस दिशा में उठाया गया कदम न केवल प्रशासनिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि इससे हजारों परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है।