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भारत की छवि धूमिल करने की सुनियोजित कोशिश, अल जज़ीरा और तुर्की मीडिया के दुष्प्रचार पर उठे सवाल,

भारत और इजरायल के बीच बढ़ते रक्षा संबंधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया के कुछ समूहों द्वारा एक सुनियोजित दुष्प्रचार अभियान चलाए जाने के आरोप सामने आए हैं। विशेष रूप से कतर स्थित मीडिया नेटवर्क अल जज़ीरा और कुछ तुर्की मीडिया संस्थानों की रिपोर्टों को लेकर यह कहा जा रहा है कि वे भारत की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाने और भारत-अरब संबंधों को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।हाल ही में अल जज़ीरा ने एक रिपोर्ट प्रकाशित कर दावा किया कि अक्टूबर 2023 से अक्टूबर 2025 के बीच इजरायल को सैन्य सामग्री की आपूर्ति करने वाले देशों में भारत दूसरा सबसे बड़ा देश था। रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिका के बाद भारत, रोमानिया, ताइवान और चेक गणराज्य इजरायल को सैन्य-संबंधी सामग्री भेजने वाले प्रमुख देश रहे। इससे पहले मिडिल ईस्ट आई सहित कुछ अन्य पश्चिम एशियाई और तुर्की मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने भी इसी प्रकार की रिपोर्टें प्रकाशित की थीं।इन रिपोर्टों में भारत-इजरायल रक्षा सहयोग को गाजा में चल रहे संघर्ष से जोड़ने की कोशिश की गई है। आलोचकों का कहना है कि यह एकतरफा नैरेटिव गढ़कर भारत को कथित तौर पर गाजा में हो रही हिंसा से जोड़ने का प्रयास है। रिपोर्टों में भारतीय गोला-बारूद और रक्षा निर्यात का उल्लेख इस तरह किया गया है, मानो भारत प्रत्यक्ष रूप से संघर्ष में शामिल हो। जबकि भारत ने हमेशा अपने रक्षा और विदेश नीति संबंधों को राष्ट्रीय हितों और रणनीतिक साझेदारी के आधार पर आगे बढ़ाया है।यह अभियान केवल रक्षा व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे भारत की अंतरराष्ट्रीय साख को प्रभावित करने की व्यापक मंशा दिखाई देती है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने ग्लोबल साउथ की एक मजबूत और विश्वसनीय आवाज के रूप में अपनी पहचान बनाई है। पश्चिम एशिया और अरब देशों के साथ भारत के आर्थिक, सामरिक और कूटनीतिक संबंध भी लगातार मजबूत हुए हैं। ऐसे में भारत को विवादों में घसीटने वाली रिपोर्टों को कई लोग एक रणनीतिक दुष्प्रचार के रूप में देख रहे हैं।अल जज़ीरा को लेकर भारत में पहले भी पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग के आरोप लगते रहे हैं। आलोचक यह सवाल भी उठा रहे हैं कि भारत के लोकतंत्र पर सवाल उठाने वाला यह नेटवर्क अपने ही देश कतर में लोकतांत्रिक व्यवस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर कभी गंभीर बहस नहीं करता। उनका कहना है कि जिस देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं का अभाव है, वहां से संचालित मीडिया नेटवर्क द्वारा भारत जैसे जीवंत लोकतंत्र पर लगातार सवाल उठाना दोहरे मापदंड को दर्शाता है।भारत और इजरायल के बीच रक्षा सहयोग पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ा है। दोनों देशों के बीच तकनीक, साइबर सुरक्षा, ड्रोन, मिसाइल सिस्टम और रक्षा उपकरणों के क्षेत्र में साझेदारी मजबूत हुई है। भारत ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि उसकी विदेश नीति संतुलित, स्वतंत्र और राष्ट्रीय हितों पर आधारित है। साथ ही भारत ने फिलिस्तीन के मानवीय मुद्दों पर भी समय-समय पर सहायता और समर्थन जारी रखा है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चल रहे इस तरह के नैरेटिव को तथ्यों और संतुलित दृष्टिकोण के साथ देखने की जरूरत है, ताकि किसी भी देश की छवि को राजनीतिक एजेंडे के तहत प्रभावित न किया जा सके।

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