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भोपाल में गंगा-जमुनी तहज़ीब और इंसानियत की अनूठी मिसाल,

भोपाल। राजधानी भोपाल में इंसानियत, संवेदनशीलता और गंगा-जमुनी तहज़ीब की एक भावुक और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। जहां एक ओर अंगदान को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर एक मुस्लिम परिवार ने कठिन परिस्थितियों में साहसिक निर्णय लेकर मानवता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया।बंसल हॉस्पिटल में पहली बार एक मुस्लिम परिवार ने अंगदान कर समाज को सकारात्मक संदेश दिया। केरल निवासी स्वर्गीय श्रीमती सजना एस. ए. के परिजनों ने अपने दुःख को मानव सेवा में बदलते हुए उनके लिवर और किडनी दान करने का निर्णय लिया। इस फैसले से तीन गंभीर मरीजों को नया जीवन मिल सका।अस्पताल प्रबंधन के अनुसार यह केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि इंसानियत और सामाजिक सौहार्द की मिसाल है। ऐसे समय में जब परिवार अपार दुःख से गुजर रहा था, तब भी उन्होंने मानव जीवन को सर्वोपरि मानते हुए अंगदान का निर्णय लिया। इस कदम ने यह साबित कर दिया कि मानवता हर धर्म और सीमाओं से ऊपर होती है।अंतिम विदाई के दौरान माहौल बेहद भावुक हो गया, जब पुलिस बल द्वारा स्वर्गीय सजना एस. ए. को गार्ड ऑफ ऑनर देकर श्रद्धांजलि दी गई। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर गया। इस सम्मान ने अंगदान के महत्व को और अधिक गहराई से समाज के सामने रखा।चिकित्सकों का कहना है कि देश में अभी भी अंगदान को लेकर जागरूकता की आवश्यकता है। विशेष रूप से समाज के विभिन्न वर्गों और समुदायों में इसे लेकर कई भ्रांतियां मौजूद हैं। ऐसे में यह पहल न केवल लोगों को प्रेरित करेगी, बल्कि अंगदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में भी मददगार साबित होगी।बंसल हॉस्पिटल ने भी मध्य भारत में ट्रांसप्लांट सेवाओं के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान स्थापित की है। अस्पताल में अब तक 51 से अधिक सफल लिवर ट्रांसप्लांट और 510 से अधिक सफल किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के माध्यम से अस्पताल लगातार मरीजों को नई जिंदगी देने का कार्य कर रहा है।यह घटना भोपाल की उस साझा संस्कृति और भाईचारे की भावना को भी मजबूत करती है, जिसके लिए शहर देशभर में जाना जाता है। अंगदान का यह प्रेरणादायक कदम समाज के लिए एक संदेश है कि किसी भी व्यक्ति का जीवन बचाना सबसे बड़ा धर्म और सबसे बड़ा दान है।

“अंगदान महादान” केवल एक नारा नहीं, बल्कि जीवन बचाने का सबसे पवित्र माध्यम है।

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