बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में बनने वाली नई NDA सरकार के शपथ ग्रहण से पहले ही राजधानी पटना में बैठकों, चर्चाओं और संभावित नामों को लेकर हलचल साफ देखी जा रही है। माना जा रहा है कि इस बार नीतीश कुमार के साथ दो उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) और लगभग 20 मंत्री शपथ लेंगे। वहीं, BJP और JDU दोनों ही अपने-अपने स्तर पर मंत्री पदों की संभावित सूची को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
सूत्रों के अनुसार, इस बार कैबिनेट गठन में गठबंधन के सभी सहयोगी दलों—JDU, BJP, LJP-R, HAM और RLM—को उचित प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है। NDA की कोशिश है कि नई सरकार की शुरुआत एक संतुलित और सर्वसमावेशी टीम से हो, ताकि संदेश साफ जाए कि गठबंधन एकजुट है और स्थिरता के साथ काम करने को तैयार है। यही वजह है कि विभागों के बंटवारे से लेकर चेहरों के चयन तक हर कदम बेहद सोच-समझकर उठाया जा रहा है।
डिप्टी सीएम पद को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है। BJP के भीतर से कई नामों की चर्चा तेज है, जबकि JDU भी अपने हिस्से को लेकर पहले से तैयार बैठी है। ऐसा माना जा रहा है कि दो उपमुख्यमंत्री बनाने के पीछे उद्देश्य सामाजिक और राजनीतिक संतुलन को मजबूत करना है, जिससे NDA के सभी वर्गों में सकारात्मक संदेश जाए। एक डिप्टी सीएम का पद BJP को मिलना लगभग तय माना जा रहा है, जबकि दूसरा पद किसे मिलेगा, इसे लेकर कयासों का दौर जारी है।
मंत्रियों की सूची में इस बार क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, जातिगत संतुलन और प्रशासनिक अनुभव तीनों को प्राथमिकता दी जा रही है। गठबंधन दलों से ऐसे चेहरे चुनने की कोशिश हो रही है जो संगठन और सरकार, दोनों के बीच बेहतर तालमेल बना सकें। कई पुराने चेहरे एक बार फिर कैबिनेट में लौट सकते हैं, वहीं कुछ नए विधायकों को भी मौका मिलने की संभावनाएँ जताई जा रही हैं।
शपथ ग्रहण समारोह के लिए सरकारी स्तर पर तैयारी तेज है। जानकारी के मुताबिक, कार्यक्रम में केंद्रीय नेतृत्व की भी मौजूदगी रहेगी, जिससे यह स्पष्ट है कि NDA केंद्र से लेकर राज्य तक एकजुट होकर इस सरकार को मजबूत शुरुआत देना चाहता है।
हालांकि अंतिम सूची अभी सामने नहीं आई है, पर इतना तय है कि कैबिनेट गठन के साथ बिहार की राजनीति में नए समीकरण देखने को मिलेंगे। BJP-JDU बैठकों के नतीजों और संभावित नामों की घोषणा पर हर किसी की नजरें टिकी हैं। नई सरकार की पहली झलक ही आने वाले राजनीतिक माहौल और प्रशासनिक प्राथमिकताओं का संकेत देगी।