दिल्ली हाई कोर्ट ने कथित आबकारी नीति मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को निशाना बनाकर चलाए गए कथित सोशल मीडिया अभियान को गंभीरता से लेते हुए आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेता अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया एवं अन्य संबंधित पक्षों को आपराधिक अवमानना मामले में नोटिस जारी किया है। अदालत ने सभी पक्षों से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 8 अगस्त को निर्धारित की गई है।यह मामला न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की खंडपीठ के समक्ष विचाराधीन है। आम आदमी पार्टी के नेताओं पर न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ कथित रूप से मानहानिकारक, अपमानजनक और अवमाननापूर्ण टिप्पणियां करने के आरोप लगाए गए हैं।न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने इससे पूर्व अरविंद केजरीवाल सहित अन्य नेताओं के विरुद्ध आपराधिक अवमानना कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा था कि आबकारी नीति मामले के कुछ आरोपमुक्त व्यक्तियों द्वारा सोशल मीडिया पर अदालत और न्यायाधीश के खिलाफ अत्यंत आपत्तिजनक, घृणित एवं मानहानिकारक टिप्पणियां की गई हैं, जिन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता।न्यायमूर्ति शर्मा ने स्पष्ट रूप से कहा था कि उनके संज्ञान में यह बात आई है कि कुछ प्रत्यर्थी उनके खिलाफ और अदालत के खिलाफ अत्यंत अपमानजनक एवं अवमाननापूर्ण सामग्री पोस्ट कर रहे हैं और इस पर मौन नहीं रहा जा सकता। कि दिल्ली के कथित आबकारी घोटाला मामले में न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की उस अपील पर आगे सुनवाई नहीं करने का निर्णय लिया था, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा अरविंद केजरीवाल एवं अन्य आरोपियों को दी गई राहत को चुनौती दी गई थी। अब इस मामले में सीबीआई की याचिका पर सुनवाई न्यायमूर्ति मनोज जैन द्वारा की जाएगी।कानूनी के अनुसार, यह मामला न्यायपालिका की गरिमा, अदालतों की स्वतंत्रता तथा सोशल मीडिया पर सार्वजनिक टिप्पणियों की सीमाओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रकरण बन सकता है।