
दीपावली का उल्लास समाप्त होते ही अब घर वापसी की बजाय कामकाज और रोज़गार की दिशा में वापसी का दौर शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों से जुड़े प्रवासी मजदूर, कर्मचारी और छात्र बड़ी संख्या में ट्रेनों के माध्यम से अपने कार्यस्थलों की ओर रवाना हो रहे हैं।इस बढ़ते यातायात दबाव के चलते प्रयागराज से दिल्ली और मुंबई मार्ग की अधिकांश ट्रेनें पूरी तरह भर चुकी हैं। रेलवे के अनुसार, अब तक 42 ट्रेनें ‘रिग्रेट’ स्थिति में पहुंच चुकी हैं — जिनमें एक भी सीट खाली नहीं है, यहां तक कि वेटिंग टिकट भी उपलब्ध नहीं हैं।
स्टेशनों पर यात्रियों का सैलाब
प्रयागराज जंक्शन और आसपास के स्टेशनों पर सुबह से शाम तक यात्रियों की भारी भीड़ देखी जा रही है। टिकट काउंटरों पर लंबी कतारें लगी हैं और कई यात्री घंटों इंतज़ार के बाद भी टिकट न मिलने से निराश लौट रहे हैं।ऑनलाइन टिकट बुकिंग भी चुनौतीपूर्ण हो गई है — आईआरसीटीसी (IRCTC) की वेबसाइट और ऐप पर टिकट खुलते ही सेकंडों में बुक हो रहे हैं।
रेलवे की स्थिति और अनुमान
रेलवे सूत्रों के अनुसार, दीपावली के बाद हर वर्ष इसी प्रकार की स्थिति बनती है। इस बार यात्रियों का दबाव अक्टूबर माह के अंत तक जारी रहने की संभावना है।अधिकारियों का कहना है कि 26 अक्टूबर को सबसे अधिक भीड़ की संभावना है, क्योंकि यह सप्ताहांत (रविवार) के बाद सोमवार से कामकाज शुरू होने का समय रहेगा।
पूरी तरह ‘पैक’ प्रमुख ट्रेनें
‘रिग्रेट’ स्थिति में आने वाली प्रमुख ट्रेनों में शामिल हैं —
- हमसफर एक्सप्रेस
- वंदे भारत एक्सप्रेस
- राजधानी एक्सप्रेस
- बाबाधाम एक्सप्रेस
- शिवगंगा एक्सप्रेस
- नंदन कानन एक्सप्रेस
- पूर्वा एक्सप्रेस
- महाबोधि एक्सप्रेस
- स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस
- सीमांचल एक्सप्रेस
- स्वर्णजयंती एक्सप्रेस
- पूर्वोत्तर संपर्क क्रांति एक्सप्रेस
- ब्रह्मपुत्र मेल
- अमृत भारत एक्सप्रेस
इन सभी ट्रेनों में स्लीपर, थर्ड एसी और सेकंड एसी कोच पूरी तरह भर चुके हैं।
प्रशासन की अपील
रेल प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी यात्रा अग्रिम योजना के साथ करें, टिकट दलालों से बचें, और आवश्यकतानुसार वैकल्पिक ट्रेनें या मार्ग अपनाएं।रेलवे विभाग ने यह भी कहा है कि अस्थायी कोच बढ़ाने और अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन पर विचार किया जा रहा है ताकि यात्रियों को अधिक सुविधा मिल सकेदीपावली के बाद हर वर्ष की तरह इस बार भी प्रवासी यात्रियों की लहर ने रेलवे नेटवर्क पर भारी दबाव डाला है, जिससे प्रयागराज जैसे जंक्शनों पर यात्रा व्यवस्था की चुनौती और भी गहरी हो गई है।