गोंडवाना आदिवासी कला केंद्र

थिलाफुशी पोर्ट प्रोजेक्ट पर मालदीव की सफाई, भारत की उपेक्षा के आरोपों को किया खारिज,

मालदीव में थिलाफुशी पोर्ट के विकास का काम चीन की कंपनी को दिए जाने के बाद भारत को कथित तौर पर दरकिनार किए जाने को लेकर उठे सवालों पर मालदीव सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। मालदीव के आर्थिक विकास, परिवहन और व्यापार मंत्रालय ने कहा है कि बंदरगाह परियोजना किसी विदेशी साझेदार को प्राथमिकता देकर नहीं, बल्कि सरकार की निर्धारित प्रक्रिया और देश के कानूनों के तहत सौंपी गई है। मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि थिलाफुशी पोर्ट के विकास का फैसला मालदीव की दीर्घकालिक विकास आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सरकार ने इस फैसले को किसी भी अंतरराष्ट्रीय साझेदार के साथ संबंधों में बदलाव के रूप में देखने से इनकार किया है। मालदीव सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि बंदरगाह का स्वामित्व, नियंत्रण और संचालन मालदीव के पास ही रहेगा। आर्थिक विकास, परिवहन एवं व्यापार मंत्री मोहम्मद सईद ने कहा कि थिलाफुशी पोर्ट परियोजना सरकार की तय प्रक्रिया के माध्यम से सौंपी गई है और इसे किसी देश या साझेदार के पक्ष या विपक्ष में लिए गए फैसले के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मालदीव अपने सभी अंतरराष्ट्रीय साझेदारों का सम्मान करता है। गौरतलब है कि वर्ष 2024 में मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की भारत यात्रा के दौरान थिलाफुशी पोर्ट को भारत और मालदीव के सहयोग से विकसित करने की घोषणा की गई थी। इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य माले पोर्ट पर बढ़ते दबाव और भीड़ को कम करना तथा मालदीव की समुद्री एवं व्यापारिक क्षमता को मजबूत करना था। हालांकि, अब मालदीव पोर्ट लिमिटेड ने थिलाफुशी पोर्ट के विकास के पहले चरण के लिए चीन की कंपनी चाइना हार्बर इंजीनियरिंग कंपनी (CHEC) के साथ समझौता किया है। परियोजना चीनी कंपनी को दिए जाने के बाद भारत को लेकर मालदीव की नीति और दोनों देशों के बीच हुए पूर्व समझौते को लेकर सवाल उठने लगे। इस बीच, CHEC को परियोजना दिए जाने की प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा तेज हुई है।

आलोचकों ने कंपनी के कुछ पुराने अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स और उनसे जुड़े वित्तीय, पर्यावरणीय तथा रणनीतिक विवादों का हवाला देते हुए सवाल उठाए हैं। हालांकि, मालदीव सरकार ने इन आरोपों के बजाय अपनी ओर से प्रक्रिया की पारदर्शिता और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप निर्णय लेने पर जोर दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब मालदीव भारत और चीन दोनों के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखने की कोशिश कर रहा है। राष्ट्रपति मुइज्जू द्वारा भारत की सहायता से चल रहे ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट की पहले सराहना भी की जा चुकी है। थिलाफुशी पोर्ट परियोजना को लेकर आने वाले समय में भारत-मालदीव संबंधों पर इसके प्रभाव को लेकर भी नजर बनी रहेगी। फिलहाल मालदीव सरकार का कहना है कि चीन की कंपनी को परियोजना सौंपना किसी साझेदार देश के खिलाफ उठाया गया कदम नहीं है, बल्कि यह मालदीव की विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप लिया गया प्रशासनिक निर्णय है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *