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उज्जैन में अंतरिक्ष विज्ञान पर मंथन, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया—युवाओं के लिए नए अवसरों का द्वार,

मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम” के दूसरे दिन उज्जैन जिले स्थित Varahamihira Astronomical Observatory Dongla में “भारत में खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान का वर्तमान और भविष्य” विषय पर आयोजित सत्र में सहभागिता की।इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देश की अंतरिक्ष उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को सुना और वैज्ञानिकों के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि Chandrayaan-3 जैसी ऐतिहासिक उपलब्धियां न केवल भारत का गौरव बढ़ाती हैं, बल्कि युवाओं को विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।सत्र में Anil Bhardwaj (निदेशक, फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी, अहमदाबाद) ने चंद्रयान-3 मिशन की सफलता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि “विक्रम लैंडर” की सॉफ्ट लैंडिंग भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि रही। इसके साथ ही भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में पहुंचने वाला विश्व का पहला देश बना। उन्होंने बताया कि “प्रज्ञान रोवर” ने चंद्रमा की सतह पर महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अध्ययन किए और लैंडिंग स्थल को “शिव शक्ति पॉइंट” नाम दिया गया।उन्होंने आगे आने वाले मिशनों—चंद्रयान-4, चंद्रयान-5 (भारत-जापान संयुक्त मिशन), वीनस ऑर्बिटर मिशन और मंगल लैंडर मिशन—की जानकारी देते हुए वर्ष 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारने की महत्वाकांक्षी योजना का भी उल्लेख किया।सत्र में Tarun Pant ने आयनोस्फियर और ऊपरी वायुमंडल की भूमिका को समझाते हुए कहा कि अंतरिक्ष गतिविधियां पृथ्वी के वातावरण और जलवायु को प्रभावित करती हैं, इसलिए इनका अध्ययन अत्यंत आवश्यक है।

अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के अंतर्गत “खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी में प्रगति” और “विकसित भारत के लिए स्पेस इकोनॉमी” जैसे विषयों पर भी विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया। इस दौरान अंतरिक्ष तकनीक को राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।नीति आयोग के सदस्य (विज्ञान) V K Saraswat ने कहा कि अंतरिक्ष तकनीक अब राष्ट्रीय सुरक्षा का भी मजबूत आधार बन चुकी है। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।Shankar Naik ने विज्ञान और अध्यात्म के समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने बताया कि उज्जैन प्राचीन काल से ही खगोल विज्ञान और काल गणना का प्रमुख केंद्र रहा है, जिससे इस सम्मेलन की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है।

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