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आयुष्मान योजना: एनएबीएच प्रमाणपत्र को लेकर 90 निजी अस्पतालों पर कार्रवाई की तैयारी, 24 घंटे का अंतिम मौका,

भोपाल। मध्यप्रदेश में आयुष्मान भारत योजना से जुड़े निजी अस्पतालों के लिए एनएबीएच प्रमाणपत्र की अनिवार्यता अब सख्ती से लागू की जा रही है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के 90 निजी अस्पतालों के पास अभी एनएबीएच प्रमाणपत्र नहीं है। विभाग ने इन अस्पतालों को जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के लिए अंतिम 24 घंटे का समय दिया है।विभाग के निर्देशों के अनुसार तय समयसीमा में एनएबीएच संबंधी शर्त पूरी नहीं करने वाले अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत नए मरीजों का इलाज रोकने की कार्रवाई की जा सकती है। इससे इन अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचने वाले आयुष्मान कार्डधारी मरीजों पर सीधा असर पड़ सकता है।प्रदेश में 1,953 अस्पताल आयुष्मान योजना से जुड़ेविभागीय आंकड़ों के मुताबिक मध्यप्रदेश में कुल 1,953 अस्पताल आयुष्मान योजना से संबद्ध हैं। इनमें 1,140 सरकारी और 813 निजी अस्पताल शामिल हैं। वहीं भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में कुल 739 अस्पताल योजना से जुड़े हैं, जिनमें 418 निजी अस्पताल हैं।इन 418 निजी अस्पतालों में से 328 अस्पतालों के पास एनएबीएच प्रमाणपत्र है, जबकि 90 अस्पताल अभी इस शर्त को पूरा नहीं कर पाए हैं।नए मरीजों के इलाज पर पड़ सकता है असरएनएबीएच प्रमाणपत्र की शर्त पूरी नहीं करने वाले अस्पतालों में सबसे पहले नए आयुष्मान मरीजों के इलाज पर असर पड़ने की संभावना है। ऐसे अस्पतालों को या तो निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी या फिर आयुष्मान योजना के तहत नए मरीजों का इलाज लेने से बाहर होना पड़ सकता है।आयुष्मान योजना की राज्य स्तरीय प्रक्रिया में निर्धारित मानकों का पालन नहीं होने की स्थिति में अस्पताल की संबद्धता समाप्त करने का प्रावधान भी मौजूद है।छह महीने की मोहलत के बाद सख्तीएनएबीएच की अनिवार्यता पहले 1 अप्रैल से लागू की जानी थी, लेकिन निजी अस्पतालों की मांग के बाद उन्हें छह महीने का अतिरिक्त समय दिया गया। इसके बाद 1 अक्टूबर से नई व्यवस्था लागू कर दी गई है। अब विभाग ने प्रमाणपत्र की प्रक्रिया पूरी नहीं करने वाले अस्पतालों को अंतिम मौका दिया है।निजी अस्पतालों की बढ़ी नाराजगीदूसरी ओर एनएबीएच की अनिवार्यता को लेकर निजी अस्पताल संचालकों में नाराजगी बनी हुई है। अस्पताल संगठनों का कहना है कि एनएबीएच मानकों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त स्टाफ, उपकरण, दस्तावेजी व्यवस्था और अन्य सुविधाओं पर खर्च बढ़ेगा।इसके साथ ही निजी अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत लंबित भुगतान और पैकेज दरों को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं। अस्पताल संगठनों का दावा है कि कई अस्पतालों के आयुष्मान क्लेम लंबे समय से लंबित हैं।इसी मुद्दे को लेकर प्रदेश के निजी अस्पताल संगठनों ने 8 अक्टूबर से आयुष्मान योजना के अनिश्चितकालीन बहिष्कार की चेतावनी दी है। ऐसे में एक ओर एनएबीएच प्रमाणपत्र को लेकर विभाग की सख्ती और दूसरी ओर निजी अस्पतालों के प्रस्तावित बहिष्कार ने आयुष्मान योजना के तहत मरीजों के इलाज को लेकर नई चुनौती खड़ी कर दी है।जनजातीय क्षेत्रों के अस्पतालों को फिलहाल राहतदूरदराज और जनजातीय बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं पर असर न पड़े, इसे देखते हुए वहां के अस्पतालों को फिलहाल एनएबीएच की अनिवार्यता से राहत दी गई है। वहीं भविष्य में प्रदेश के अन्य जिलों में भी इस व्यवस्था को लागू करने की तैयारी है।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अंतिम 24 घंटे की समयसीमा में कितने निजी अस्पताल एनएबीएच की शर्त पूरी कर पाते हैं और यदि बहिष्कार की चेतावनी पर अमल होता है, तो इसका आयुष्मान कार्डधारी मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं पर कितना असर पड़ेगा।

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