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अतिथि विद्वानों के हितों की रक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध, सभी मांगों पर होगा सकारात्मक निर्णय: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव,

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के अतिथि विद्वान केवल शिक्षण कार्य से जुड़े कर्मचारी नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी के भविष्य के निर्माता हैं। राज्य सरकार उनके सम्मान, सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अतिथि विद्वानों की सभी मांगों पर विचार करने के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जिसकी अनुशंसाएं प्राप्त होते ही सरकार आवश्यक और सकारात्मक निर्णय लेगी।मुख्यमंत्री शुक्रवार को भोपाल के रवीन्द्र भवन में आयोजित प्रदेश स्तरीय अतिथि विद्वान सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर अतिथि विद्वानों ने मुख्यमंत्री का अंगवस्त्र ओढ़ाकर एवं तुलसी का पौधा भेंट कर स्वागत किया।मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना है और गुरू-शिष्य परंपरा सदियों से देश की शिक्षा व्यवस्था की आधारशिला रही है। आज भी महाविद्यालय उसी गौरवशाली परंपरा के प्रतीक हैं, जहां अतिथि विद्वान विद्यार्थियों के जीवन को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।उन्होंने बताया कि सरकार अतिथि विद्वानों के लिए पहले ही कई महत्वपूर्ण फैसले ले चुकी है। इनमें वर्ष में 13 आकस्मिक एवं 3 ऐच्छिक अवकाश, महिला अतिथि विद्वानों के लिए प्रसूति अवकाश, घर के निकट महाविद्यालय चुनने की सुविधा, लोक सेवा आयोग की सहायक प्राध्यापक भर्ती में 25 प्रतिशत आरक्षण तथा आयु सीमा में 10 वर्ष की छूट शामिल है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2022 में 117 और वर्ष 2024 में 48 अतिथि विद्वानों को नियमित सहायक प्राध्यापक के पद पर नियुक्ति मिली है।डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाया जा रहा है। प्रदेश में प्रत्येक जिले में पीएमश्री एक्सीलेंस कॉलेज स्थापित किए गए हैं, जबकि खरगौन, गुना और सागर में नए शासकीय विश्वविद्यालय प्रारंभ हुए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य का सकल नामांकन अनुपात (GER) अब राष्ट्रीय औसत से बेहतर हो चुका है तथा स्कूल शिक्षा में ड्रॉपआउट दर लगभग शून्य पर पहुंच गई है।उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि राज्य सरकार ने अतिथि विद्वानों के हितों की रक्षा के लिए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। उन्होंने बताया कि स्थानांतरण की सुविधा, फॉल-आउट की स्थिति में पुनः अवसर तथा भर्ती प्रक्रिया में विशेष प्रावधानों से हजारों अतिथि विद्वानों को लाभ मिल रहा है।मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में युवाओं से नशामुक्त मध्यप्रदेश के निर्माण का आह्वान भी किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश नक्सलवाद जैसी चुनौती से मुक्त हुआ है। अब राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2029 तक मध्यप्रदेश को पूर्णतः नशामुक्त बनाना है। उन्होंने अतिथि विद्वानों और युवाओं से इस जन अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।कार्यक्रम में उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारी, राज्य अतिथि विद्वान संघ के प्रतिनिधि तथा प्रदेशभर से बड़ी संख्या में अतिथि विद्वान उपस्थित रहे।

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