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भोपाल में जल संकट चौथे दिन भी बरकरार, टैंकर वितरण को लेकर उठे सवाल

भोपाल। राजधानी भोपाल में कोलार वॉटर सप्लाई प्रोजेक्ट की 30 वर्ष पुरानी ग्रेविटी मेन पाइपलाइन फटने से उत्पन्न जल संकट चौथे दिन भी पूरी तरह समाप्त नहीं हो सका है। शहर की लगभग 5 लाख आबादी अब भी इस समस्या से प्रभावित है। नियमित जलापूर्ति बाधित होने के कारण हजारों परिवारों को पेयजल के लिए टैंकरों और वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर निर्भर रहना पड़ रहा है।सोमवार को सनखेड़ी क्षेत्र के समीप कोलार परियोजना की मुख्य पाइपलाइन में अचानक रिसाव और क्षति आने के बाद नगर निगम को शहर के कई हिस्सों में जलापूर्ति रोकनी पड़ी थी। इसके चलते बड़ी संख्या में कॉलोनियों और आवासीय क्षेत्रों में पानी का संकट गहरा गया। चार दिन बीत जाने के बावजूद हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं और नागरिकों की परेशानी बनी हुई है।जल संकट के बीच टैंकरों के वितरण को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। नगर निगम के जलकार्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, ज़ोन-8 के अंतर्गत आने वाले चार इमली और तुलसी नगर क्षेत्रों में पिछले दो दिनों के दौरान लगभग 200 से 250 टैंकर ट्रिप किए गए। इन क्षेत्रों में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर आसीन लोगों के निवास होने के कारण इन इलाकों में पानी की आपूर्ति अपेक्षाकृत अधिक होने के आरोप लगाए जा रहे हैं।वहीं दूसरी ओर, कई सामान्य आवासीय कॉलोनियों के निवासियों का कहना है कि उन्हें आवश्यकता के अनुरूप टैंकर उपलब्ध नहीं कराए गए। कई क्षेत्रों में लोगों को घंटों तक पानी का इंतजार करना पड़ा, जबकि कुछ परिवारों को निजी टैंकरों की सेवाएं लेने के लिए अतिरिक्त खर्च भी करना पड़ा। प्रभावित नागरिकों का कहना है कि संकट की घड़ी में पानी का वितरण समान रूप से होना चाहिए ताकि सभी क्षेत्रों को राहत मिल सके।नगर निगम प्रशासन का कहना है कि जल संकट से प्रभावित क्षेत्रों में 70 टैंकरों की व्यवस्था की गई है। ये टैंकर प्रतिदिन लगभग 490 ट्रिप कर रहे हैं और आवश्यकता के अनुसार विभिन्न इलाकों में पानी पहुंचाया जा रहा है।

उपलब्ध जल संसाधनों और मांग के आधार पर टैंकरों का संचालन किया जा रहा है।जमीनी स्तर पर कई क्षेत्रों से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे टैंकर वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता और प्राथमिकता निर्धारण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। नागरिक संगठनों और स्थानीय रहवासियों ने मांग की है कि नगर निगम प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों की तैनाती और वितरण का सार्वजनिक विवरण जारी करे, ताकि किसी प्रकार की असमानता की स्थिति स्पष्ट हो सके।इस बीच नगर निगम की तकनीकी टीम पाइपलाइन की मरम्मत और जलापूर्ति बहाल करने के कार्य में जुटी हुई है। अधिकारियों का दावा है कि मरम्मत कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही शहर में नियमित जलापूर्ति बहाल कर दी जाएगी।फिलहाल राजधानी के हजारों परिवारों की नजरें नगर निगम की व्यवस्थाओं पर टिकी हैं। नागरिक उम्मीद कर रहे हैं कि जल संकट का जल्द समाधान होगा और पेयजल आपूर्ति सामान्य होने से उन्हें राहत मिलेगी।

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