भोपाल — प्राचीन नवग्रह शनि मंदिर में शनि जयंती महोत्सव के अंतर्गत आयोजित 121 कुंडी श यज्ञनि महायज्ञ में मंगलवार से श्रद्धालुओं द्वारा आहुतियाँ प्रारंभ हो गईं और आज महायज्ञ का भव्य समापन पूर्ण आहुति व भंडारे के साथ संपन्न हुआ। आयोजन में भागवत पुराण की 51 प्रतिष्ठा और संगीत के साथ श्रीमद् भागवत कथा का भी आयोजन किया गया, जिसने उपस्थित जनमानस को आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति से ओतप्रोत कर दिया। मंदिर संस्थापक और मुख्य पुजारी पंडित गजेंद्र शास्त्री की उपस्थिति में पंडित जितेंद्र वैष्णव ने श्रीमद् भागवत कथा का विस्तार से वाचन किया। कथा के दौरान उन्होंने बताया कि भागवत कथा का श्रवण करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति संभव है और इससे आंतरिक परिवर्तन तथा मानसिक शुद्धि होती है। कथा के माध्यम से धर्म, कर्म और भक्ति के प्रमुख प्रसंगों का स्मरण कराया गया, जिससे भक्तों ने गम्भीर मनोभाव के साथ सुनवाई और सैकड़ों ने भाव-विभोर हो कर छत्र-छाया में प्रसाद ग्रहण किया।यज्ञ आचार्य पंडित गजेंद्र शास्त्री ने बताया कि शनि महायज्ञ शुरू होते ही सुबह से भारी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और निरन्तर आहुतियाँ देते रहे। उन्होंने कहा कि महायज्ञ का उद्देश्य लोक कल्याण, समाज में शांति एवं समृद्धि तथा शनि ग्रह की दशा से उत्पन्न बाधाओं का निवारण करना था। विशेषकर शनि चरी अमावस्या और शनि जयंती के पवित्र अवसर पर आयोजित इस महायज्ञ में वैदिक मंत्रोच्चारण और यज्ञ साधना का वातावरण अत्यंत पवित्र एवं आध्यात्मिक बना रहा। कार्यक्रम में 121 कुंडी श यज्ञ का विधान विधिपूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें विधिवत् ब्राह्मणों ने मंत्रोचारण के साथ आहुतियाँ डालीं और विश्व शांति, परिवारों की खुशहाली तथा बीमारों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना की गई। यज्ञ के समापन पर पूर्ण आहुति दी गई और उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण कर आयोजन की गरिमा को बढ़ाया।मंदिर परिसर में विशेष रूप से कई गणमान्य व्यक्तियों और समाजसेवियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में श्री रमेश चंद (गाँव मोड), प्रवीण जी गुप्ता, श्री ओम प्रकाश मिश्रा, राखी नाराज, मोना ठाकुर, माया बैरागी एवं नवग्रह शांति मंडल समिति के सदस्य प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इनके साथ-साथ स्थानीय सैकड़ों भक्तों ने भी इस धार्मिक आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लिया और भक्ति भाव से यज्ञ व कथा दोनों का लाभ उठाया। आयोजकों ने बताया कि इस तरह का आयोजन समाज में एकता, नैतिकता एवं आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा देता है। उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में भी ऐसे धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करते रहेंगे ताकि परंपरा और धर्म के प्रति नये पीढ़ी में भी जागरूकता बनी रहे। यज्ञ आचार्य व मंदिर प्रबंधन ने सभी श्रद्धालुओं, दानदाताओं और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया और सबके कल्याण की कामना की।शाम के समय मंदिर परिसर भक्तिमय नज़रों से सराबोर दिखा, जहां दीपमाला और भजन-कीर्तन ने माहौल को और भी गरिमामय बना दिया। कार्यक्रम की सफलता पर आयोजकों ने संतोष व्यक्त किया और बताया कि प्राप्त दान से मंदिर की सामाजिक कल्याण योजनाओं तथा अगले धार्मिक तोरणों के आयोजन में सहयोग दिया जाएगा।