मध्यप्रदेश पुलिस में बढ़ती भ्रष्टाचार की शिकायतों के बीच अब सख्त कार्रवाई की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। हाल ही में सिवनी और गुना जैसे मामलों में पुलिसकर्मियों के नाम सामने आने के बाद पुलिस मुख्यालय ने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए ठोस निर्णय लिया है।इस क्रम में, सीआईडी के अंतर्गत आने वाली इंटरनल विजिलेंस विंग को पुनः पूरी तरह सक्रिय किया जाएगा। यह विंग विशेष रूप से पुलिस विभाग के भीतर भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की निगरानी करेगी तथा शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।प्राप्त जानकारी के अनुसार, विजिलेंस टीम मौके पर जाकर रिश्वतखोरी और अन्य अवैध गतिविधियों में संलिप्त कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। इसके साथ ही आय से अधिक संपत्ति के मामलों में भी जांच और छापेमारी की जाएगी।उल्लेखनीय है कि वर्ष 1973 में स्थापित यह इंटरनल विजिलेंस विंग एक समय काफी प्रभावी मानी जाती थी, लेकिन धीरे-धीरे इसकी सक्रियता कम हो गई थी। अब इसे फिर से मजबूत और सक्रिय बनाकर पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने और आमजन का विश्वास बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है।यह कदम पुलिस विभाग में अनुशासन और जवाबदेही को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।