गोंडवाना आदिवासी कला केंद्र

ग्राम ग्वारी रिछारिया बाबा में मां आदिशक्ति ज्वारा विसर्जन, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक संरक्षण का संदेश,

ग्राम ग्वारी रिछारिया बाबा में आज मां आदिशक्ति ज्वारा का विधिवत विसर्जन श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, समाज के प्रतिनिधि और आदिवासी समुदाय के सदस्य उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान की झलक देखने को मिली।कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने सामाजिक एकता, प्राकृतिक संतुलन और सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। देश के मूल निवासियों से आह्वान किया गया कि वे अपनी परंपराओं, अधिकारों और प्रकृति के साथ जुड़ी जीवनशैली को संरक्षित रखें तथा आने वाली पीढ़ी को इसकी पहचान कराएं।इस अवसर पर यह भी कहा गया कि आधुनिक समय में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच अपनी जड़ों और प्राकृतिक संस्कृति को बचाए रखना बेहद आवश्यक है। समाज के युवाओं को जागरूक करते हुए उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने और सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाने के लिए प्रेरित किया गया।कार्यक्रम में सर्व आदिवासी समाज, मिशन मध्यभारत, आदिवासी बचाओ आंदोलन तथा ऑल इंडिया एंडीजीनियस स्टूडेंट फेडरेशन भारत के प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रही। सभी संगठनों ने मिलकर सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक संरक्षण और समुदाय की एकजुटता का संदेश दिया।अधिवक्ता देवसिंह कुमरे, राष्ट्रीय विधि सलाहकार, ने अपने संबोधन में कहा कि समाज की मजबूती उसकी एकता और सांस्कृतिक धरोहर में निहित है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और अपनी परंपराओं को संजोकर रखें।कार्यक्रम का समापन “जय सेवा, जय जोहार, जय आदिवासी” के नारों के साथ हुआ, जिसने पूरे वातावरण को उत्साह और एकजुटता से भर दिया।

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