मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारत की संस्कृति मातृसत्ता प्रधान रही है और हमारी परंपराओं में नारी को सर्वोच्च सम्मान दिया गया है। भारत की पहचान सदैव विश्व गुरु के रूप में रही है। भारतीय संस्कृति ने अपने ज्ञान और मूल्यों के आधार पर तक्षशिला और नालंदा जैसे महान विश्वविद्यालयों के माध्यम से शिक्षा की धारा को विश्व के कोने-कोने तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत का समय बदल रहा है और देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक क्षेत्रों में विश्व का नेतृत्व कर रहा है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को सागर में ज्ञानवीर विश्वविद्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड की धरती पर शिक्षा के क्षेत्र में यह एक नया अध्याय है और ज्ञानवीर विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित यह आधुनिक शिक्षा मंदिर क्षेत्र के युवाओं के सपनों को नई उड़ान देगा। मुख्यमंत्री ने इस पहल के लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत का अभिनंदन किया।मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञानवीर केवल एक विश्वविद्यालय का नाम नहीं है, बल्कि यह एक बेटे की अपने माता-पिता के प्रति श्रद्धांजलि है। मंत्री श्री राजपूत ने अपनी माता ज्ञानबाई और पिता वीर सिंह के नाम को मिलाकर इस विश्वविद्यालय का नाम रखा है, जो माता-पिता के प्रति सम्मान और समर्पण का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विश्वविद्यालय बुंदेलखंड के युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में नए अवसर उपलब्ध कराएगा। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे समय के साथ चलते हुए कौशल और तकनीक में दक्षता हासिल करें।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार बुंदेलखंड के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। वर्ष 2003 के बाद से इस क्षेत्र में विकास की नई गति देखने को मिली है। पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री उमा भारती, श्रद्धेय श्री बाबूलाल गौर और पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में भी बुंदेलखंड को विशेष प्राथमिकता दी गई। उन्होंने बताया कि हाल ही में खजुराहो में आयोजित कैबिनेट बैठक में बुंदेलखंड के विकास के लिए 27 हजार करोड़ रुपये के विशेष पैकेज को मंजूरी दी गई है, जिससे क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा और युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर मिलेंगे।मुख्यमंत्री ने कहा कि बुंदेलखंड वीरों की भूमि रही है। इस क्षेत्र की पहचान महाराजा छत्रसाल के साहस और पराक्रम से भी जुड़ी है। उन्होंने अपने समय में अनेक युद्ध लड़कर इस क्षेत्र में सनातन संस्कृति की रक्षा की। आल्हा-ऊदल जैसे वीरों की गाथाएं आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं। बुंदेलखंड के वीरों ने अपने शौर्य और बलिदान से मातृभूमि की रक्षा की है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारतीय क्रिकेट टीम को विश्व विजेता बनने की उपलब्धि और आगामी होली पर्व की बधाई देते हुए कहा कि आज भारत के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई प्रतिष्ठित संस्थानों में भारतीय मूल के लोग शीर्ष पदों पर कार्य कर रहे हैं, जो हमारी उत्कृष्ट शिक्षा व्यवस्था का परिणाम है।अवसर पर मुख्यमंत्री ने राहतगढ़ और जेसीनगर में श्रमिकों के बच्चों के लिए लाइब्रेरी बनाने की घोषणा भी की।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त किया और इस दिन को सागर के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि ज्ञानवीर विश्वविद्यालय की स्थापना की प्रक्रिया तब शुरू हुई थी, जब डॉ. मोहन यादव प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री थे और उन्होंने इस विश्वविद्यालय की फाइल पर हस्ताक्षर कर इसकी शुरुआत कराई थी। उन्होंने बताया कि सागर अब उन चुनिंदा शहरों में शामिल हो गया है जहां केंद्रीय विश्वविद्यालय, राज्य विश्वविद्यालय और मेडिकल कॉलेज तीनों की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ज्ञानवीर विश्वविद्यालय के नवनिर्मित परिसर का उद्घाटन कर विभिन्न शैक्षणिक सुविधाओं का अवलोकन भी किया। विशेष रूप से विधि के विद्यार्थियों के लिए तैयार की गई मूट कोर्ट (Moot Court) आकर्षण का केंद्र रही। मूट कोर्ट एक कृत्रिम न्यायिक कार्यवाही होती है, जिसमें कानून के विद्यार्थी किसी काल्पनिक मामले पर वास्तविक अदालत की तरह बहस करते हैं। इससे उन्हें न्यायिक प्रक्रिया और वकालत की बारीकियों का व्यावहारिक अनुभव मिलता है।ने मूट कोर्ट का अवलोकन करते हुए विद्यार्थियों से संवाद किया और उनके उत्साह की सराहना की। उन्होंने कहा कि केवल पुस्तकीय ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक अनुभव भी एक कुशल अधिवक्ता और न्यायविद बनने के लिए आवश्यक है।मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर बुंदेलखंड की पारंपरिक खान-पान संस्कृति की भी सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से ज्वार, बाजरा और मक्का जैसे मोटे अनाज से बने व्यंजनों को स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताया और स्थानीय भोजन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय व्यंजनों को प्रोत्साहित करना “वोकल फॉर लोकल” के संकल्प को मजबूत करता है।कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल, रहली विधायक एवं पूर्व मंत्री श्री गोपाल भार्गव, खुरई विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह, सागर विधायक श्री शैलेन्द्र जैन, नरयावली विधायक श्री प्रदीप लारिया, देवरी विधायक श्री ब्रज बिहारी पटेरिया, बंडा विधायक श्री वीरेन्द्र सिंह लोधी, बीना विधायक श्रीमती निर्मला सप्रे, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री हीरा सिंह राजपूत, महापौर श्रीमती संगीता सुशील तिवारी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।