युवा तकनीक और नवाचार से जुड़ें, मध्यप्रदेश बनेगा कृषि में अग्रणी: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव,

डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि यदि युवा कृषि क्षेत्र में नवाचार और आधुनिक तकनीक के साथ आगे आएंगे तो मध्यप्रदेश न केवल खाद्यान्न उत्पादन में बल्कि कृषि आधारित उद्योगों, जैविक उत्पादों और एग्री-एक्सपोर्ट में भी देश में अग्रणी स्थान प्राप्त करेगा। मुख्यमंत्री रविवार को इंदौर के बास्केटबाल कॉम्पलेक्स में एक निजी मीडिया संस्थान द्वारा आयोजित “किसान कल्याण की बात युवाओं के साथ” कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं और विशेषज्ञ किसानों से संवाद भी किया।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है और राज्य को देश का अग्रणी कृषि राज्य बनाने की दिशा में सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष को कृषि और किसानों को समर्पित करते हुए “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में युवाओं की भूमिका को सशक्त बनाना, किसान हितैषी नीतियों पर संवाद स्थापित करना तथा आधुनिक खेती को बढ़ावा देना है।संवाद कार्यक्रम में युवा किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से विभिन्न विषयों पर सीधे प्रश्न किए। एक रोबोट द्वारा भी कृषि विकास को लेकर प्रश्न पूछा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि युवा नई तकनीकों—जैसे ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कृषि प्रबंधन, स्मार्ट सिंचाई प्रणाली और डिजिटल मार्केटिंग—से जुड़ेंगे तो वे अपनी आय बढ़ाने के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना सकेंगे। उन्होंने जैविक खेती, फूड प्रोसेसिंग और कृषि आधारित उद्योगों में युवाओं की सक्रिय भागीदारी पर बल दिया।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों और युवाओं के हित में विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। भावांतर योजना के तहत किसानों को समर्थन मूल्य के अंतर की राशि प्रदान की जा रही है। कृषि स्टार्टअप को प्रोत्साहन, प्रशिक्षण कार्यक्रम, सब्सिडी योजनाएं तथा किसान उत्पादक संगठनों को सशक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिल सकें।उन्होंने बताया कि फसल बीमा, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी, कृषि यंत्रीकरण, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना और निर्यात को बढ़ावा देने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। प्रदेश ने गेहूं, सोयाबीन और चना सहित विभिन्न फसलों के उत्पादन में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।

सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और नर्मदा परियोजनाओं के माध्यम से जल उपलब्धता बढ़ाई जा रही है। माइक्रो इरिगेशन को प्रोत्साहन, जैविक एवं प्राकृतिक खेती तथा फसल विविधीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बिजली की सरप्लस उपलब्धता सुनिश्चित की गई है और किसानों को 24 घंटे बिजली प्रदाय की जा रही है। सोलर पंप पर सब्सिडी दी जा रही है, जिससे सिंचाई के रकबे में निरंतर वृद्धि हो रही है। वर्तमान में मध्यप्रदेश में सिंचाई का रकबा 55 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुका है, जिसे वर्ष 2028 तक 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज कृषि केवल जीविकोपार्जन का साधन नहीं, बल्कि नवाचार, स्टार्टअप और मूल्य संवर्धन के माध्यम से आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बन रही है। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने आधुनिक एवं नवाचार आधारित खेती करने वाले प्रगतिशील किसानों का सम्मान किया तथा प्रदर्शनी का अवलोकन कर युवाओं के प्रयासों की सराहना की।इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव, सांसद श्री शंकर लालवानी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

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