अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने अपने महत्वाकांक्षी मार्स सैंपल रिटर्न (MSR) प्रोग्राम को रद्द करने का फैसला किया है। यह निर्णय अंतरिक्ष विज्ञान और मंगल ग्रह पर जीवन की खोज से जुड़े वैश्विक प्रयासों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इस फैसले के साथ ही नासा द्वारा मंगल ग्रह से मिट्टी और चट्टानों के नमूने पृथ्वी पर लाकर उनका विस्तृत अध्ययन करने की योजना फिलहाल ठप हो गई है।मार्स सैंपल रिटर्न प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य नासा के पर्सेवरेंस रोवर द्वारा इकट्ठा किए गए उन भूवैज्ञानिक नमूनों को पृथ्वी पर लाना था, जिनमें मंगल ग्रह पर कभी सूक्ष्म जीवन (माइक्रोबियल लाइफ) के संकेत मिलने की संभावना जताई जा रही थी। पर्सेवरेंस रोवर अब तक लगभग 30 अहम नमूने एकत्र कर चुका है, जिनमें से एक नमूने को नासा ने अब तक मंगल पर जीवन का सबसे स्पष्ट संकेत बताया था। इन नमूनों के अध्ययन से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिल सकती थी कि क्या मंगल ग्रह पर कभी जीवन मौजूद था।हालांकि, बजट की कमी के कारण नासा इस प्रोग्राम को आगे बढ़ाने में असमर्थ रहा। लाइव साइंस के अनुसार, अमेरिकी सीनेट द्वारा हाल ही में पारित एक नए खर्च बिल ने इस मिशन की संभावनाओं को और कमजोर कर दिया। यह बिल उन वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए निराशाजनक है, जो पर्सेवरेंस द्वारा एकत्र किए गए नमूनों के विश्लेषण की उम्मीद लगाए बैठे थे। मौजूदा हालात को देखते हुए अब इन नमूनों के 2040 से पहले पृथ्वी पर पहुंचने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है।नासा ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रोग्राम को पूरी तरह छोड़ने के बजाय उसमें बड़े बदलावों पर विचार किया गया था। एजेंसी ने नमूने वापस लाने के लिए दो अलग-अलग रणनीतियों पर काम करने की बात कही थी। इनमें एक रणनीति में पहले से आजमाए जा चुके लैंडिंग सिस्टम का उपयोग शामिल था, जिसमें रॉकेट से चलने वाली स्काई क्रेन तकनीक का इस्तेमाल किया जाना था। इस पूरी योजना की अनुमानित लागत 6.6 से 7.7 अरब डॉलर के बीच बताई गई थी, जो नासा के मौजूदा बजट के लिहाज से काफी अधिक थी। अंततः लागत और तकनीकी जटिलताओं को देखते हुए MSR प्रोग्राम को रद्द करने का निर्णय लिया गया।इस फैसले के बाद मंगल ग्रह पर जीवन की खोज की वैश्विक दौड़ में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। नासा के इस मिशन से हटने के बाद अब चीन इस क्षेत्र में अग्रणी बनता नजर आ रहा है। चीन का तियानवेन-3 मिशन वर्ष 2028 में लॉन्च होने और 2031 तक मंगल से चट्टानों के नमूने पृथ्वी पर वापस लाने के लिए शेड्यूल किया गया है। यदि इसे एक रेस के रूप में देखा जाए, तो फिलहाल चीन इस दौड़ में अकेला बचा हुआ है और उसके पहले सफल सैंपल रिटर्न मिशन को अंजाम देने की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है। यह अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में चीन के लिए अमेरिका पर एक बड़ी रणनीतिक और वैज्ञानिक बढ़त साबित हो सकती है, हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि अंतिम नतीजों पर अभी कोई जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

साउथवेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट की प्रमुख अंतरिक्ष वैज्ञानिक और मार्स एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम एनालिसिस ग्रुप की चेयरपर्सन विक्टोरिया हैमिल्टन ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,“यह समझना मुश्किल है कि मार्स सैंपल रिटर्न जैसे अहम प्रोग्राम को कैंसिल कर दिया गया। यह साफ दर्शाता है कि मंगल ग्रह से नमूने वापस लाना अमेरिका के लिए तकनीकी और आर्थिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।”कुल मिलाकर, नासा का यह फैसला मंगल ग्रह पर जीवन की खोज के प्रयासों में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। जहां एक ओर यह निर्णय अमेरिका के अंतरिक्ष कार्यक्रमों की प्राथमिकताओं में बदलाव को दिखाता है, वहीं दूसरी ओर यह चीन के लिए अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी खोलता है। आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मंगल ग्रह के रहस्यों से पर्दा उठाने की इस दौड़ में कौन सा देश सफलता हासिल करता है।