भारतीय पुलिस सेवा संघ (म. प्र.)–2026 समागम का भव्य शुभारंभ

भारतीय पुलिस सेवा संघ (म. प्र.)–2026 समागम का माननीय मुख्यमंत्री महोदय एवं पुलिस महानिदेशक म.प्र. की गरिमामयी उपस्थिति में आज प्रात: कुशाभाऊ ठाकरे सभागार (मिंटो हॉल) में दीप प्रज्वलित कर
उद्घाटन किया गया।

उद्घाटन के अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री महोदय ने पुलिस विभाग की महत्ता बताते हुए पुलिस कार्य में चुनौतियाँ का जिक्र किया। साथ ही नक्सल वाद की समस्या का पूर्ण उन्मूलन की बधाई की पुलिस को बधाई दी तथा कहा कि नई ऊर्जा का संचालन करने के लिए श्रीकृष्ण भगवान की सेना का अनुशासन हमे से प्रेरणा लेनी चाहिए। हमारे देश की आंतरिक सुरक्षा और प्रशासनिक तंत्र को मजबूत करने में पुलिस का सबसे महत्वपूर्ण योगदान होता है। साथ ही कहा कि पुलिस अधिकारी समागम के दो दिनों में अपने अनुभव साझा कर उत्साह के साथ समागम का आनंद लें।

पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाना ने वर्ष 2025 में मध्य प्रदेश पुलिस की उपलब्धियों और चुनौतियों के विषय में संबोधन दिया तथा नक्सल समस्या का उन्मूलन, डायल 112 का संचालन, ई-जीरो FIR, पुलिस के उत्कृष्ट कार्य, गुम बालक बालिकाओं की दस्तयाबी, सेफ क्लिक अभियान, तनाव मुक्ति का प्रयास, नशा मुक्ति अभियान, पुलिस भर्ती बोर्ड , इन्वेस्टीगेशन अलाउंस आदि विषयों पर संबोधन दिया तथा उज्जैन महाकुंभ की तैयारियों की जानकारी दी।

उपरांत स्पीकर श्री राजेश पंडित द्वारा “Inside the Mind’s Eye” पर सारगर्भित व्याख्यान दिया गया। श्री राजेश पंडित एक प्रतिष्ठित प्रबंधन सलाहकार, शिक्षाविद और स्टार्टअप सलाहकार हैं। उन्होंने मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की है तथा प्रतिष्ठित संगठनों में नेतृत्व पदों पर रहते हुए वैश्विक और भारतीय दोनों ग्राहकों का प्रबंधन किया है। एक व्यावहारिक शिक्षाविद के रूप में, वे आईआईएम अहमदाबाद और इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस हैदराबाद में पढ़ाते हैं। उनका जीवन का ध्येय भारतीय युवाओं की सफलता में योगदान देना है।

भारतीय पुलिस सेवा संघ, मध्यप्रदेश द्वारा वर्ष 2026 का वार्षिक सम्मेलन दिनांक 16 एवं 17 जनवरी 2026 को भोपाल में आयोजित किया जा रहा है। दो दिवसीय इस आयोजन में प्रदेश भर के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी तथा उनके परिजन सहभागिता करेंगे। सर्विस मीट का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों के बीच आपसी समन्वय को सुदृढ़ करना, व्यावसायिक विचार-विमर्श को प्रोत्साहित करना तथा सांस्कृतिक और पारिवारिक सहभागिता के माध्यम से सौहार्दपूर्ण वातावरण का निर्माण करना है।

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