‘सशक्त नारी–समर्थ नारी’ संवाद: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महिलाओं को बताया विकास और नेतृत्व की धुरी,

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश की माताओं-बहनों के सम्मान, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर कार्य कर रही है। केंद्र सरकार द्वारा संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण और प्रदेश में नगरीय निकायों व शासकीय सेवाओं में 35 प्रतिशत आरक्षण इस बात का प्रमाण है कि नारी शक्ति को नीति-निर्माण और शासन में केंद्रीय भूमिका दी जा रही है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में आज देश की बहनें भारतीय सेनाओं में भी शीर्ष पदों पर पहुँच रही हैं, जो बदलते भारत की तस्वीर प्रस्तुत करता है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह विचार मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित ‘सशक्त नारी–समर्थ नारी’ संवाद कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए। इस अवसर पर प्रबुद्ध महिलाएं, आजीविका मिशन से जुड़ी बहनें, ड्रोन दीदियाँ, महिला उद्यमी और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर रहीं महिलाओं से मुख्यमंत्री ने आत्मीय संवाद किया। उन्होंने कहा कि “आज महिलाएं नहीं, बहनें मेरे घर आई हैं,” और यही आत्मीयता पूरे संवाद का केंद्र बनी। मुख्यमंत्री ने बहनों के साथ समूह चित्र भी खिंचवाया।कार्यक्रम के दौरान बालिका सरगम कुशवाह ने मधुर देशभक्ति गीत प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सरगम की प्रतिभा की सराहना करते हुए 51 हजार रुपये की सम्मान राशि देने की घोषणा की और कहा कि बेटियों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बहन-बेटियों से इस प्रकार का संवाद आगे भी निरंतर जारी रहेगा।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने निजी जीवन का उल्लेख करते हुए अपनी सफलता का श्रेय अपनी बड़ी बहन श्रीमती कलावती यादव को दिया। उन्होंने कहा कि मां और बहन से मिले संस्कार, प्रेम और हौसले ने ही उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने सनातन संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मातृ सत्ता पर आधारित संस्कृति है, जहां मां जीवन की पहली गुरु होती है और भारत को माता के रूप में देखा जाता है। सरकार का उद्देश्य भी यही है कि शासन से आमजन को वही सुरक्षा और विश्वास मिले, जैसा मां के आंचल से मिलता है।मुख्यमंत्री ने प्रदेश में चल रही विकास गतिविधियों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि औद्योगिक विकास के साथ-साथ चिकित्सा सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। जन-निजी भागीदारी (पीपीपी मोड) पर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल खोलने के लिए 25 एकड़ तक भूमि लीज पर उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे मध्यप्रदेश इस क्षेत्र में देश का पहला राज्य बना है। साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मेधावी विद्यार्थियों की एमबीबीएस की 70 से 80 लाख रुपये तक की फीस राज्य सरकार द्वारा वहन की जा रही है।

महिला उद्यमिता पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप और औद्योगिक विकास में अग्रणी राज्य बनकर उभर रहा है। बीते दो वर्षों में स्टार्ट-अप्स को विशेष प्रोत्साहन दिया गया है, जिनमें बड़ी संख्या में महिला उद्यमियों का नेतृत्व है। सूक्ष्म, लघु, कुटीर उद्योगों से लेकर भारी उद्योगों तक महिलाओं को हरसंभव सहयोग प्रदान किया जा रहा है। प्रदेश में लागू 18 नई नीतियों में महिलाओं को केंद्र में रखा गया है, जिससे उन्हें रोजगार, उद्यम और नेतृत्व के नए अवसर मिल रहे हैं।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाड़ली बहना योजना ने महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। आर्थिक स्वावलंबन के साथ-साथ उनका आत्मविश्वास और आत्मसम्मान बढ़ा है। आज प्रदेश के कई जिलों में महिलाएं कलेक्टर, एसपी, महापौर, सरपंच और अन्य प्रशासनिक दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रही हैं। यह नारी शक्ति के सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण है।कार्यक्रम में स्वास्थ्य, शिक्षा, टेक्सटाइल, कृषि, मीडिया और उद्यमिता से जुड़ी महिलाओं ने अपने अनुभव, नवाचार और चुनौतियां साझा कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी शक्ति की सक्रिय भागीदारी से ही समाज संतुलित, संवेदनशील और मजबूत बनता है। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार महिलाओं की प्रगति में हर कदम पर उनके साथ खड़ी है और यह संवाद उसी विश्वास का प्रतीक है।

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