ब्लाइंड महिला टी-20 वर्ल्ड कप विजेता बेटियां महिला सशक्तिकरण का प्रतीक : राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल,

राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि ब्लाइंड महिला टी-20 वर्ल्ड कप–2025 की विजेता भारतीय टीम की बेटियां न केवल खेल जगत में बल्कि समाज में भी महिला सशक्तिकरण, आत्मविश्वास और दिव्यांगजनों की अपार क्षमताओं का सशक्त प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि इन बेटियों की उपलब्धि यह सिद्ध करती है कि सीमाएं शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक होती हैं। जब संकल्प मजबूत हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।राज्यपाल श्री पटेल सोमवार को लोकभवन में राष्ट्रीय ब्लाइंड महिला टी-20 क्रिकेट टीम की मध्यप्रदेश की खिलाड़ी सुश्री सुषमा पटेल, सुश्री सुनीता सराठे और सुश्री दुर्गा येवले से सौजन्य भेंट एवं चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर राज्यपाल ने तीनों खिलाड़ियों को शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने खिलाड़ियों के साथ-साथ उनके प्रशिक्षकों के योगदान की भी सराहना की और कहा कि कोचों का मार्गदर्शन खिलाड़ियों की सफलता की मजबूत नींव होता है।राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि दिव्यांग महिला खिलाड़ियों ने जिस साहस, अनुशासन और समर्पण के साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व किया है, वह प्रत्येक देशवासी के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि इन बेटियों ने न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे भारत का नाम विश्व स्तर पर रोशन किया है। यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को खेल और जीवन दोनों क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।उल्लेखनीय है कि भारतीय महिला (ब्लाइंड) क्रिकेट टीम ने 23 नवम्बर 2025 को श्रीलंका के कोलंबो में आयोजित टी-20 वर्ल्ड कप–2025 के फाइनल मुकाबले में नेपाल को पराजित कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। यह जीत भारतीय ब्लाइंड महिला क्रिकेट के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज की गई है।इस विजेता भारतीय टीम में मध्यप्रदेश की तीन प्रतिभावान खिलाड़ी शामिल रहीं। इनमें नर्मदापुरम जिले की सुश्री सुनीता सराठे, दमोह जिले की सुश्री सुषमा पटेल और बैतूल जिले की सुश्री दुर्गा येवले ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से टीम की जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इन खिलाड़ियों ने सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद कड़ी मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर यह मुकाम हासिल किया।

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि राज्य सरकार और समाज का दायित्व है कि ऐसी प्रतिभाओं को हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाए, ताकि वे भविष्य में और अधिक ऊंचाइयों को छू सकें। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों के लिए खेल केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समावेशन का सशक्त जरिया है।चर्चा के दौरान खिलाड़ियों ने भी अपने अनुभव साझा किए और बताया कि यह जीत उनके जीवन का सबसे यादगार क्षण है। उन्होंने राज्यपाल के प्रोत्साहन और सम्मान के लिए आभार व्यक्त किया।कार्यक्रम में सकारात्मक वातावरण और उत्साह देखने को मिला। राज्यपाल श्री पटेल ने आशा व्यक्त की कि ये खिलाड़ी भविष्य में भी देश के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धियां अर्जित करेंगी और अन्य दिव्यांग बेटियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगी।

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