सत्य, धर्म और सेवा ही जीवन की वास्तविक पूँजी : राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल,

राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि जो व्यक्ति सत्य बोलता है और धर्म का पालन करता है, उसे जीवन में कभी कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता। जीवन मूल्य ही व्यक्ति की वास्तविक पूँजी होते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय के विद्यार्थी होने का उन्हें सौभाग्य प्राप्त हुआ है। भावी जीवन में माता-पिता, गुरुजन, समाज और राष्ट्र की सेवा का भाव सदैव बनाए रखें।राज्यपाल श्री पटेल गुरुवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय के छठवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विद्यार्थियों से अपेक्षा की कि विश्वविद्यालय से प्राप्त संस्कारों और अनुभवों के आधार पर वे वंचित वर्गों तथा पीड़ित मानवता की सेवा निरंतर करते रहेंगे।राज्यपाल ने कहा कि स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी का राष्ट्रप्रेम, ओजस्वी व्यक्तित्व और हिन्दी के प्रति अनुराग हिन्दी भाषा के गौरव का प्रतीक है। उन्होंने आपातकाल के समय गुजरात में आयोजित सभा का स्मरण करते हुए बताया कि स्वर्गीय जयप्रकाश नारायण ने कहा था कि अटल जी के मुख में सरस्वती का वास है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अटल जी की अंतिम यात्रा में पाँच किलोमीटर पैदल चलने को अपने नेता के प्रति श्रद्धा का अभूतपूर्व उदाहरण बताया।श्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लागू नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने विद्यार्थियों के जीवन मूल्यों और उपलब्धियों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं। भारत ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे समाज के बौद्धिक स्तंभ बनकर अपनी प्रतिभा, संवेदना और संकल्प से राष्ट्र की चुनौतियों को अवसर में बदलें तथा वंचित वर्गों की विकास-यात्रा में सहभागी बनें।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में राज्यपाल ने माँ सरस्वती एवं स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलन किया। सभी संकायों में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को पदक प्रदान किए गए। विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन, स्मारिका एवं स्नातक प्रथम वर्ष की हिन्दी पाठ्यपुस्तक का लोकार्पण किया गया। दीक्षांत समारोह में स्नातक के 60, स्नातकोत्तर के 68 तथा अनुपस्थित 42 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान करने की घोषणा की गई।इस अवसर पर प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति के अध्यक्ष श्री रविन्द्र कन्हारे ने विद्यार्थियों को अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व और कृतित्व से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। पूर्व कुलपति प्रो. मोहनलाल छीपा ने कहा कि हिन्दी विश्वविद्यालय का उद्देश्य हिन्दी को ज्ञान-विज्ञान, शासन और वैश्विक संवाद की भाषा बनाना है। कुलगुरु श्री देव आनंद हिण्डोलिया ने विश्वविद्यालय की भावी योजनाओं की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों को दीक्षांत शपथ दिलाई। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन कुल सचिव श्री शैलेन्द्र कुमार जैन ने किया।

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