तुर्की के F-16 लड़ाकू विमानों ने ग्रीस की वायु सीमा में घुसपैठ की, तनाव बढ़ा,

पूर्वी भूमध्य सागर में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। तुर्की के F-16 लड़ाकू विमानों ने 1 सितंबर को ग्रीस की वायु सीमा में घुसपैठ की। ये लड़ाकू विमान हवा से हवा में मार करने वाली उन्नत cसमेत कई प्रकार के हथियारों से लैस थे। ऐसा माना जा रहा है कि तुर्की ने यह कदम ग्रीस को उकसाने के लिए उठाया, जिससे दोनों देशों के बीच पुराना तनाव एक बार फिर उभर कर सामने आया।ग्रीस के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह पिछले 30 महीनों में तुर्की द्वारा की गई पहली हवाई घुसपैठ है। ग्रीस और तुर्की के बीच लंबे समय से भूमध्य सागर और एजियन सागर के द्वीपों को लेकर विवाद चला आ रहा है। दोनों देश नाटो के सदस्य होने के बावजूद कई बार युद्ध के करीब पहुंच चुके हैं। ग्रीस को भारत का करीबी सहयोगी माना जाता है, जबकि तुर्की खुले तौर पर पाकिस्तान का समर्थन करता है, जिससे क्षेत्रीय समीकरण और जटिल हो जाते हैं।हेलेनिक नेशनल डिफेंस जनरल स्टाफ (GEETHA) ने बताया कि तुर्की के F-16 लड़ाकू विमान बिना किसी औपचारिक उड़ान योजना के एथेंस फ्लाइट आइडेंटिफिकेशन रेंज (FIR) में प्रवेश कर गए। यह क्षेत्र हवाई यातायात नियंत्रण और निगरानी के लिए ग्रीस के अधीन है। ग्रीस ने इसे अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात नियमों का उल्लंघन मानते हुए तुरंत अपने लड़ाकू विमानों को मौके पर रवाना किया।

ग्रीक लड़ाकू विमानों के पहुंचते ही तुर्की के F-16 विमानों ने दिशा बदल ली और वापस अंतरराष्ट्रीय वायु क्षेत्र में लौट गए। ग्रीस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि इस दौरान उसकी आधिकारिक हवाई सीमा का उल्लंघन नहीं हुआ, लेकिन तुर्की की इस हरकत को उसने गंभीर उकसावे के रूप में देखा है।विशेषज्ञों का कहना है कि तुर्की की यह कार्रवाई एक प्रकार की शक्ति-प्रदर्शन की कोशिश हो सकती है, जिसका उद्देश्य ग्रीस पर दबाव बनाना और क्षेत्रीय मुद्दों पर अपनी आक्रामक नीति को जारी रखना है। वहीं, ग्रीस ने साफ कर दिया है कि वह अपने हवाई और समुद्री क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा।दोनों देशों के बीच यह ताजा तनाव उस समय सामने आया है जब नाटो और यूरोपीय संघ क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के प्रयास कर रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस प्रकार की घटनाएं बार-बार होती रहीं, तो भूमध्य सागर और एजियन सागर में सैन्य गतिविधियां और बढ़ सकती हैं, जिससे न केवल ग्रीस और तुर्की के बीच बल्कि पूरे क्षेत्र में अस्थिरता पैदा हो सकती है।

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