भोपाल, 8 अगस्त 2025 – प्रांतीय महिला स्व सहायता समूह महासंघ ने प्रदेशभर की लाखों स्व-सहायता समूह एवं रसोइया बहनों की गंभीर समस्याओं के समाधान हेतु शासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। महासंघ की प्रदेश अध्यक्ष ने इस संबंध में एक आग्रह पत्र जारी कर सरकार से सकारात्मक एवं ठोस कदम उठाने की अपील की है।महासंघ के अनुसार, प्रदेश की स्व-सहायता समूह एवं रसोइया बहनों को पिछले तीन से चार माह से पारिश्रमिक नहीं मिला है, जिससे वे गहरे आर्थिक संकट से गुजर रही हैं। संगठन ने सवाल उठाया है कि जो महिलाएं वर्षों से निष्ठा व समर्पण के साथ सेवाएं दे रही हैं, उन्हें अपने मेहनताना के लिए बार-बार आंदोलन, हड़ताल और धरने का सहारा क्यों लेना पड़ रहा है।संगठन ने “एक शाला, एक परिसर” जैसी नई योजनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर किसी भी समूह या रसोइया बहन का रोजगार छीना जाना अन्यायपूर्ण है। शासन को विद्यालयों की स्थिति सुधारने और बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए जनजागरूकता अभियान चलाना चाहिए, न कि वर्षों से सेवा दे रहीं बहनों को बेरोजगार करना चाहिए।
महासंघ ने मांग की है कि –
- लंबित पारिश्रमिक का तत्काल भुगतान हो।
- विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर किसी को हटाया न जाए।
- “एक शाला, एक परिसर” योजना में रोजगार बचाने की व्यवस्था हो।
- बिना ठोस कारण किसी भी समूह से काम न छीना जाए।
- केंद्रीकृत मैकेनाइज्ड किचन प्रणाली पर रोक लगे, क्योंकि इससे हजारों महिलाएं बेरोजगार होंगी और बच्चों के स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।
महासंघ ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा प्रदेश की लाखों बहनों के आत्मसम्मान और भविष्य से जुड़ा है। संगठन ने उम्मीद जताई कि शासन इस गंभीर विषय पर संवेदनशीलता के साथ विचार कर शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय लेगा।