अमेरिका द्वारा 25% आयात शुल्क लागू करने की घोषणा भारतीय निर्यात पर बड़ा झटका: विशेषज्ञों ने जताई चिंता,

नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को सोशल मीडिया के माध्यम से एक अप्रत्याशित घोषणा करते हुए भारत से आयातित वस्तुओं पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाने की बात कही है। भारत सरकार और निर्यातकों को उम्मीद थी कि अमेरिका इस प्रकार का कठोर निर्णय नहीं लेगा, लेकिन इस फैसले ने भारतीय व्यापार जगत को चिंता में डाल दिया है।हालांकि ट्रंप के पहले के निर्णयों को देखते हुए यह संभावना जताई जा रही है कि यह शुल्क स्थायी नहीं रहेगा, फिर भी यदि यह लागू रहता है तो भारतीय वस्तु निर्यात पर सीधा असर पड़ेगा, खासकर उन सेक्टर्स पर जो रोजगार-प्रधान हैं। भारत हर वर्ष लगभग 440 अरब डॉलर का वस्तु व्यापार करता है, जिसमें से लगभग 90 अरब डॉलर का निर्यात अकेले अमेरिका के बाजार में होता है।विशेषज्ञों का कहना है कि टेक्सटाइल, लेदर, फुटवियर, जेम्स एंड ज्वैलरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे क्षेत्रों से भारत का लगभग 22% निर्यात अमेरिका को होता है। इन क्षेत्रों में लाखों लोगों को रोजगार मिला हुआ है। अब 25% का आयात शुल्क लागू होने से भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में अन्य प्रतिस्पर्धी देशों जैसे वियतनाम, इंडोनेशिया, यूरोपीय यूनियन, जापान की वस्तुओं की तुलना में काफी महंगे हो जाएंगे।

यह भी उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने अन्य देशों पर भारत की तुलना में कम शुल्क लगाया है—जैसे कि यूरोपीय यूनियन और जापान पर 15-15%, इंडोनेशिया पर 19% और वियतनाम पर 20% का शुल्क लगाया गया है। बांग्लादेश पर 35% शुल्क है, लेकिन भारत का उससे प्रतिस्पर्धा केवल टेक्सटाइल और फुटवियर के क्षेत्र में है।चीन के साथ भारत की तुलना करें तो अमेरिका ने चीन पर 30% शुल्क लगाया है, लेकिन चीन का उत्पादन स्तर बहुत अधिक और लागत बहुत कम है, जिससे भारत उसके साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएगा। भारत की लागत और उत्पादन क्षमताएं चीन से कमतर हैं, जिससे भारतीय वस्तुओं की प्रतिस्पर्धात्मकता कमजोर हो जाएगी।

भारतीय निर्यात संगठनों और उद्योग मंडलों ने सरकार से अपील की है कि वे अमेरिका के साथ उच्च स्तरीय बातचीत कर इस शुल्क को हटवाने या कम करवाने की दिशा में प्रयास करें। यदि यह शुल्क बना रहता है, तो भारत के लाखों कारीगरों, छोटे उद्यमों और निर्यातकों को गंभीर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।भारत सरकार की ओर से अभी तक इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि वाणिज्य मंत्रालय इस विषय पर शीघ्र कोई स्पष्ट कदम उठाएगा।

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