
तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोğan अपनी वायुसेना को विश्वस्तरीय ताकत बनाना चाहते हैं। ड्रोन सुपरपावर के रूप में पहचान बना चुका तुर्की अब अपनी एयरफोर्स में आधुनिक फाइटर जेट शामिल करने जा रहा है। इसके लिए तुर्की ने ब्रिटेन और जर्मनी के साथ समझौता कर 40 यूरोफाइटर टाइफून जेट खरीदने पर सहमति बना ली है। यह डील लगभग 5.6 अरब डॉलर की मानी जा रही है।यह सौदा ऐसे समय पर हुआ है जब तुर्की और उसके पड़ोसी देशों के बीच तनाव चरम पर है। विशेषकर ग्रीस, इज़रायल और साइप्रस के साथ तुर्की के रिश्ते बेहद तल्ख हैं। विश्लेषकों का मानना है कि तुर्की इस डील के जरिए अपने पड़ोसियों को सैन्य शक्ति का संदेश देना चाहता है।
यूरोफाइटर टाइफून – 4.5 पीढ़ी का आधुनिक जेट
यूरोफाइटर टाइफून जेट को ब्रिटेन, जर्मनी, इटली और स्पेन मिलकर बनाते हैं। इसे 4.5 पीढ़ी का अत्याधुनिक फाइटर जेट माना जाता है, जो फ्रांस के राफेल और अमेरिका के एफ-16 से तुलनीय है। यह जेट मल्टी-रोल कॉम्बैट ऑपरेशन के लिए बेहद सक्षम माना जाता है। तुर्की को इन जेट्स की डिलीवरी चरणबद्ध तरीके से दी जाएगी।
अमेरिकी एफ-35 डील फंसी, तुर्की ने चुना यूरोफाइटर
दरअसल, तुर्की पहले अमेरिका से एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट खरीदना चाहता था। लेकिन अमेरिका ने अब तक इसकी मंजूरी नहीं दी। इसका बड़ा कारण तुर्की का रूसी एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदना है। अमेरिका लगातार दबाव बना रहा है कि तुर्की रूस का एस-400 सिस्टम छोड़े, लेकिन अंकारा इससे पीछे हटने को तैयार नहीं।अमेरिका की सख्ती और इज़रायल के दबाव की वजह से एफ-35 डील अधर में लटक गई। ऐसे में तुर्की ने साल 2023 से ही यूरोफाइटर टाइफून खरीदने के लिए कोशिशें तेज कर दी थीं।
जर्मनी के विरोध के पीछे ग्रीस-इज़रायल का असर
हालांकि तुर्की को इन जेट्स की खरीद में शुरुआती दिक्कतें आईं। जर्मनी की सरकार ने इस डील का विरोध किया था। इसके पीछे जर्मनी के करीबी तीन देश इज़रायल, ग्रीस और साइप्रस थे। तुर्की इन तीनों पड़ोसी देशों को लगातार धमकाने की नीति पर चल रहा है, जिससे यूरोपियन यूनियन में चिंता बढ़ गई।लेकिन ब्रिटेन और जर्मनी के साथ हुए हालिया समझौते के बाद यह डील लगभग तय मानी जा रही है। ब्रिटेन तुर्की को ये जेट देने के पक्ष में था और जर्मनी ने भी कूटनीतिक दबाव के बाद सहमति दे दी है।
पूरे इलाके में बढ़ सकता है तनाव
विशेषज्ञों का कहना है कि तुर्की के इस कदम से पूर्वी भूमध्यसागर और मध्य पूर्व में सैन्य संतुलन बदल सकता है। ग्रीस और साइप्रस पहले ही अपनी वायुसेना को मजबूत कर रहे हैं। वहीं इज़रायल तुर्की को लेकर पहले से सतर्क है। इस डील के बाद तुर्की अपने ड्रोन प्रोग्राम के साथ-साथ फाइटर जेट पावर में भी बड़ा कदम उठा लेगा।तुर्की की इस पहल को लेकर नाटो देशों में भी मतभेद दिख रहे हैं। जहां ब्रिटेन इसे नाटो की ताकत मान रहा है, वहीं ग्रीस और साइप्रस इसे क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बता रहे हैं।