
राजधानी भोपाल में आगामी गणेश उत्सव और नवरात्रि के दौरान मूर्ति विसर्जन की व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेश के अनुपालन में भोपाल नगर निगम ने अब शहर के तालाबों में मूर्तियों के विसर्जन पर पूर्ण रोक लगा दी है।भोपाल की महापौर श्रीमती मालती राय ने नगर निगम अधिकारियों के साथ इन स्थलों का निरीक्षण किया और आवश्यक व्यवस्थाओं को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से मालीखेड़ी घाट को व्यवस्थित करने पर जोर दिया है।महापौर ने कहा कि “भोपाल के जलस्रोतों को प्रदूषण से मुक्त बनाए रखने के लिए यह निर्णय अत्यंत आवश्यक है। NGT के निर्देशों के तहत तालाबों में प्रतिमा विसर्जन पर रोक लगाई गई है, और नगर निगम जनसुविधा को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक और समुचित विसर्जन स्थलों की व्यवस्था कर रहा है।नगर निगम द्वारा शहर के चारों दिशाओं में चार नए विसर्जन घाट विकसित किए जा रहे हैं। प्रारंभिक चरण में जिन स्थानों का चयन किया गया है, वे हैं:
- नीलबड़
- बरकतउल्ला विश्वविद्यालय परिसर
- मालीखेड़ी
- प्रेमपुरा घाट के पास
”गौरतलब है कि पिछले वर्षों तक नगर निगम द्वारा शहर के प्रेमपुरा, खटलापुरा, हथाईखेड़ा डैम, आर्च ब्रिज, बैरागढ़ और मालीखेड़ी घाट पर ही प्रतिमाओं के विसर्जन की व्यवस्था की जाती रही है। भोपाल शहर के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों की संख्या में छोटी-बड़ी मूर्तियाँ इन घाटों पर विसर्जित की जाती थीं, जिसकी जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन और नगर निगम मिलकर संभालते थे।अब जब विसर्जन को सीमित घाटों तक केंद्रीकृत किया जा रहा है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बढ़ते जनसंख्या दबाव और धार्मिक भावनाओं के बीच नगर निगम कैसे व्यवस्थाओं को संतुलित करता है।नगर निगम ने आमजन से अपील की है कि वे प्राकृतिक जल स्रोतों की रक्षा में सहयोग करें और प्रशासन द्वारा निर्धारित विसर्जन घाटों का ही उपयोग करें।