रोहिंग्या संकट को लेकर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की गंभीर चेतावनी – मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस का बयान वैश्विक चिंता का विषय,

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने रोहिंग्या शरणार्थी संकट को लेकर एक गंभीर चेतावनी दी है, जो क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए चिंताजनक संकेत दे सकती है। उन्होंने कहा कि म्यांमार से विस्थापित होकर बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में रह रहे हजारों रोहिंग्या युवा गहरी निराशा और गुस्से की स्थिति में हैं, क्योंकि उनके प्रत्यावर्तन (रिपैट्रिएशन) की प्रक्रिया वर्षों से गतिरोध में फंसी हुई है।मुहम्मद यूनुस ने यह टिप्पणी जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) के कार्यकारी वरिष्ठ उपाध्यक्ष मियाजाकी कत्सुरा के साथ बैठक के दौरान की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “यह एक अत्यंत दुखद स्थिति है। हजारों युवा बिना किसी आशा के शिविरों में पले-बढ़े हैं और अब वे तेजी से निराश और क्रोधित हो रहे हैं।”इस बयान के बाद कई सुरक्षा विशेषज्ञ और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह चेतावनी किसी बड़े क्षेत्रीय सुरक्षा संकट की ओर संकेत है? क्योंकि बीते कुछ महीनों से मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका, बांग्लादेश की सहायता से म्यांमार के एक हिस्से में हस्तक्षेप की योजना बना रहा है, जिसमें रोहिंग्या युवाओं को कथित रूप से विद्रोही रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

बांग्लादेश सरकार ने 2017 में मानवता के आधार पर म्यांमार के रखाइन राज्य से भागे रोहिंग्या मुस्लिमों के लिए अपनी सीमाएं खोली थीं। वर्तमान में बांग्लादेश में लगभग 13 लाख रोहिंग्या शरणार्थी हैं, जिनमें से अधिकांश कॉक्स बाजार और भसांन चार द्वीप पर बने विशाल शिविरों में रह रहे हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रोहिंग्या युवाओं में निराशा और आक्रोश की यह भावना बनी रही, तो यह न केवल बांग्लादेश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता पर भी प्रभाव डाल सकती है।बांग्लादेश सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपेक्षा की जा रही है कि वे इस मुद्दे पर तत्काल और ठोस रणनीति बनाकर समाधान की दिशा में कार्य करें, जिससे रोहिंग्या युवाओं को आशा और भविष्य की दिशा मिल सके।

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