प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति श्री डोनाल्ड ट्रंप के बीच बुधवार को एक महत्वपूर्ण टेलीफोन वार्ता हुई। यह बातचीत राष्ट्रपति ट्रंप के आग्रह पर हुई, जिसमें दोनों नेताओं ने भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों, हालिया क्षेत्रीय घटनाक्रमों और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की।वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का उल्लेख करते हुए इस प्रकार की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में भारत पूरी मजबूती और स्पष्टता के साथ खड़ा है तथा किसी भी प्रकार के दबाव या हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा।भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर भी बातचीत में स्पष्टता देखने को मिली। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को दो टूक शब्दों में यह स्पष्ट किया कि भारत-पाक संघर्ष को रोकने या उसमें मध्यस्थता की कोई भूमिका अमेरिका की नहीं रही है। यह द्विपक्षीय मामला है जिसे भारत अपने रणनीतिक और कूटनीतिक तरीकों से ही सुलझाएगा।विदेश सचिव श्री विक्रम मिसरी ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इस संवाद के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को अमेरिका आने का निमंत्रण भी दिया। उन्होंने जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान कनाडा में हुई उपस्थिति का उल्लेख करते हुए कहा, “अब जब आप कनाडा आए हैं, तो लौटते समय अमेरिका भी आ जाइए।”

हालाँकि, प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को धन्यवाद देते हुए स्पष्ट किया कि वह पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के कारण फिलहाल इस निमंत्रण को स्वीकार नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका के संबंधों की मजबूती के लिए दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग लगातार जारी रहेगा, चाहे वह व्यक्तिगत दौरे हों या उच्चस्तरीय द्विपक्षीय संवाद।प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति ट्रंप के साथ भारत-अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी को और प्रगाढ़ करने की दिशा में मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही, वैश्विक मंचों पर दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूती देने पर भी सहमति बनी।दोनों नेताओं ने निकट भविष्य में प्रत्यक्ष मुलाकात की संभावना जताई और अपने-अपने अधिकारियों को इस दिशा में आवश्यक समन्वय जारी रखने के निर्देश दिए।