
आज हम भारत के महान क्रांतिवीर, क्रांति सूर्य, धरती आबा, भगवान बिरसा मुंडा जी को उनकी शहादत दिवस पर कोटि-कोटि श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।महज 24 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा, आदिवासी अस्मिता की पहचान, और भारत देश की आज़ादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उनका अद्वितीय संघर्ष ‘उलगुलान’ केवल ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ नहीं था, बल्कि सामाजिक न्याय, आत्मसम्मान और संविधानिक अधिकारों की स्थापना के लिए एक व्यापक क्रांति थी।धरती आबा बिरसा मुंडा जी का जीवन आदिवासी समाज के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने सिखाया कि जब अन्याय, शोषण और छल का साम्राज्य खड़ा हो, तब ‘उलगुलान’ ही रास्ता है – एकता, स्वाभिमान और संघर्ष का रास्ता।
आज का दिन हमें याद दिलाता है कि:
- हमारे गांव में हमारा शासन हो,
- जल, जंगल और जमीन की रक्षा ही असली राष्ट्र सेवा है,
- भाईचारा, सामाजिक एकता और पर्यावरण संरक्षण ही टिकाऊ भविष्य की कुंजी हैं।
हम, मूलवासी आदिवासी समाज सहित संपूर्ण राष्ट्र, भगवान बिरसा मुंडा जी के विचारों को अमर रखने का संकल्प लेते हैं। यह सामाजिक उलगुलान अब भी जारी है – संविधान, मानवता, और संप्रभुता की रक्षा हेतु।
– अधिवक्ता देवसिंह कुमरे
राष्ट्रीय विधि सलाहकार, भारत