
हाल ही में बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति एक बार फिर अस्थिरता की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। देश के कार्यवाहक मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं। छात्रों, सरकारी कर्मचारियों, व्यापारियों और विभिन्न राजनीतिक व धार्मिक संगठनों द्वारा यूनुस सरकार के विरोध में सड़कों पर प्रदर्शन किए जा रहे हैं।देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति भी लगातार बिगड़ती जा रही है। लूटपाट, बलात्कार और हिंसा की घटनाएं आम होती जा रही हैं। इन हालातों के बीच मोहम्मद यूनुस द्वारा मुख्य सलाहकार के पद से इस्तीफे की धमकी देना, और फिर उसे वापस लेना, राजनीतिक संकट को और जटिल बना रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूनुस की इस्तीफे की धमकी एक रणनीतिक दबाव का हिस्सा है, जिससे वे राजनीतिक दलों और सेना पर चुनाव की समयसीमा को लेकर प्रभाव डालना चाहते हैं।सेना प्रमुख जनरल वकार उज-जमान ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे दिसंबर 2025 से पहले आम चुनाव कराए जाने के पक्ष में हैं, ताकि लोकतांत्रिक सरकार को समय पर सत्ता सौंपी जा सके। उन्होंने यह भी जाहिर किया कि यूनुस प्रशासन द्वारा लिए गए कई फैसले सेना से उचित परामर्श के बिना लिए गए, जिससे सैन्य नेतृत्व असंतुष्ट है।फिलहाल मोहम्मद यूनुस द्वारा इस्तीफा वापस लिए जाने से राजनीतिक संकट अस्थायी रूप से टल गया है, लेकिन यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि स्थिति सामान्य हो गई है। देश को स्थायित्व की ओर ले जाने के लिए सभी पक्षों – प्रशासन, सेना और राजनीतिक दलों – के बीच आपसी संवाद और सहमति अत्यंत आवश्यक है।