मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज जल संरक्षण की महत्ता पर बल देते हुए प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अपने-अपने स्तर पर पानी बचाने में सक्रिय योगदान दें। उन्होंने कहा कि जल ही जीवन है और इसके संरक्षण के प्रति प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।मुख्यमंत्री ने कहा, “जल है तो कल है” — यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक पुण्य भावना है, जिसे प्रदेश के हर नागरिक के मन में होना चाहिए। उन्होंने जल संकट की गंभीरता की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए बताया कि जल संरक्षण अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है।डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जनजागरण अभियान चलाकर जल बचाने के उपायों की जानकारी आमजन तक पहुँचाएं और साथ ही जल-स्रोतों के संरक्षण, वर्षा जल संचयन एवं उपयोग के परंपरागत तरीकों को बढ़ावा दें।मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि प्रदेश की जनता इस पुनीत कार्य में शासन का साथ देकर एक जल-संवेदनशील समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएगी।

नगर निगम भोपाल के जोन क्रमांक 05 वार्ड क्रमांक 09 में स्थित जल संरचनाओं में बड़े बाग की बावड़ी का महत्वपूर्ण स्थान है। बावड़ी का निर्माण लगभग 200 वर्ष पूर्व किया गया था। बावड़ी तीन मंजिला है, इसकी दीवार सीढियों और मुंडेर से लेकर मेहराब तक बेल पत्तियां बनी है। नगर निगम आयुक्त ने बताया कि जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत नगर निगम भोपाल द्वारा इस बावड़ी से प्लास्टिक वेस्ट, फ्लोटिंग पदार्थ एवं लगभग 40 क्यूबिक मीटर सिल्ट निकाली गयी। बावड़ी की दीवारों से नुकसानदेह खरपतवार को अलग किया गया, जिससे बावड़ी की आवक क्षमता 2000 लीटर प्रति घंटा हो गयी है। वर्तमान में इसके जल का उपयोग निस्तार कार्यों में हो रहा है। बावड़ी में दीवारों एवं सीढ़ियों की मरम्मत कर इनकी रंगाई-पुताई, पलेग स्टोन बिछाने एवं लोहे की जाली (फेब्रीकेशन) लगाने का कार्य भी किया गया है।