डोनाल्ड ट्रंप के यूक्रेन युद्ध से हटने के निर्णय ने तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान के लिए एक नया अवसर उत्पन्न किया है। एर्दोगान ने कहा है कि केवल तुर्की ही यूरोपीय संघ को पतन से बचा सकता है और वह यूरोप की रक्षा के लिए आवश्यक उपाय कर सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि तुर्की की सदस्यता के बिना यह संभव नहीं है, और वे पिछले 40 वर्षों से इस सदस्यता की मांग कर रहे हैं।यूक्रेन युद्ध के चलते यूरोपीय देशों की स्थिति कमजोर हुई है, और रूस के बढ़ते प्रभाव से चिंतित, एर्दोगान ने एक बार फिर यूरोपीय संघ में शामिल होने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। उनका मानना है कि तुर्की, जो एशिया और यूरोप के बीच का पुल है, यूरोप की बूढ़ी होती जनसंख्या को नए सिरे से जीवनदान दे सकता है।

एर्दोगान ने धुर दक्षिणपंथी आंदोलनों की बढ़ती प्रवृत्ति के प्रति भी चेतावनी दी, जो कि पश्चिमी देशों में चिंताजनक स्थिति पैदा कर रहे हैं। उनके अनुसार, इस तरह के कट्टरपंथी आंदोलन यूरोप के लिए एक गंभीर चुनौती बन गए हैं, और इससे निपटने के लिए तुर्की की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।