परिषद में दो साल के कार्यकाल के लिए नए गैरस्थायी सदस्यों की एंट्री हुई है। इन सदस्यों में एक पाकिस्तान भी है। इस एंट्री ने खासतौर से भारत का ध्यान खींचा है। पाकिस्तान के यूएनएससी के इतिहास और भारत से रिश्ते में तनाव को देखते हुए ये नई दिल्ली की परेशानी बढ़ा सकता है। ये इसलिए भी अहम है क्योंकि बांग्लादेश, म्यांमार, अफगानिस्तान जैसे कई एशियाई देश अस्थिरता से गुजर रहे हैं। इसका फायदा पाकिस्तान अपने भारत विरोधी एजेंडे के लिए उठा सकता है।पाकिस्तान फिहाल अस्थायी सदस्य बना है लेकिन जुलाई 2025 में पाकिस्तान UNSC का अध्यक्ष भी बनेगा। इतना ही नहीं पाकिस्तान इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा बैन कमेटी में भी शामिल होगा, जो आतंकवादियों को नामित और उनको बैन करती है।

पाकिस्तान ने UNSC के सदस्य के रूप में अपने एजेंडे में ‘अफगानिस्तान में आतंकवाद’ का मुद्दा उठाने की बात कही है। यह पाक का TTP और दूसरे गुटों को काबू करने का प्रयास है। पाकिस्तान ने इन हमलों के लिए अफगानिस्तान और उसके तालिबान शासकों को जिम्मेदार ठहराया है। पाकिस्तान दुनिया को दिखाना चाहता है कि वह आतंकवाद से पीड़ित है।