गोंडवाना आदिवासी कला केंद्र

विश्व स्वास्थ्य दिवस पर भोपाल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल, कैंसर इलाज में खामियां उजागर,

विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर जहां देशभर में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और सुदृढ़ चिकित्सा प्रणाली की बात की जा रही है, वहीं मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की जमीनी स्थिति कई गंभीर चिंताएं सामने ला रही है। विशेष रूप से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के उपचार को लेकर सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था सवालों के घेरे में है।AIIMS Bhopal जैसे आधुनिक और प्रमुख संस्थान में भी कैंसर मरीजों को अपेक्षित राहत नहीं मिल पा रही है। यहां PET स्कैन जैसी अत्यंत आवश्यक जांच सुविधा अब तक शुरू नहीं हो सकी है, जबकि इसके लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध बताया जाता है। परिणामस्वरूप मरीजों को निजी डायग्नोस्टिक केंद्रों में महंगी जांच करानी पड़ रही है, जहां एक बार की जांच पर लगभग 20 हजार रुपये तक खर्च आता है। साथ ही, प्रतिदिन 200-250 मरीजों के दबाव के कारण लंबी प्रतीक्षा, उपचार में देरी और मानसिक तनाव की स्थिति बनी हुई है।Hospital में भी अधूरी तैयारियों का उदाहरण सामने आया है। यहां करीब 75 करोड़ रुपये की लागत से कैंसर रेडिएशन उपचार के लिए अत्याधुनिक बंकर तैयार किया गया है, लेकिन आवश्यक मशीनों की स्थापना अब तक नहीं हो पाई है। लगभग 20 करोड़ रुपये की मशीनों की खरीद का प्रस्ताव लंबित होने के कारण यह सुविधा शुरू नहीं हो सकी है, जिससे मरीजों को अन्य संस्थानों का रुख करना पड़ रहा है।

JP Hospital की स्थिति और अधिक चिंताजनक है। यहां कैंसर मरीजों के लिए न तो विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध हैं और न ही आधुनिक उपचार सुविधाएं। यह अस्पताल केवल रेफरल केंद्र बनकर रह गया है, जहां से मरीजों को अन्य अस्पतालों में भेजा जाता है।इसी प्रकार Kamla Nehru Gas Rahat Hospital में वर्षों से मशीनें खराब पड़ी हैं और उनके सुधार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इसके चलते मरीजों को कीमोथेरेपी और अन्य उपचार के लिए अन्यत्र जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की हानि होती है।अस्पतालों—जैसे एम्स, हमीदिया और बीएमएचआरसी—में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन संसाधनों का विस्तार उसी अनुपात में नहीं हुआ है। डॉक्टरों की कमी, सीमित मशीनें और बढ़ते मरीजों का दबाव इलाज में देरी का प्रमुख कारण बन रहे हैं।इस स्थिति के चलते मरीजों की निर्भरता निजी अस्पतालों, विशेषकर Jawaharlal Nehru Cancer Hospital पर बढ़ती जा रही है। यहां इलाज की लागत अधिक होने से आम और मध्यम वर्ग के परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। कई मरीजों को इलाज के लिए कर्ज लेने या अपनी जीवनभर की बचत खर्च करने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *