गोंडवाना आदिवासी कला केंद्र

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ओंकारेश्वर में एकात्म पर्व का किया शुभारंभ, अद्वैत दर्शन के वैश्विक संदेश पर दिया जोर,

डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि अद्वैत ज्ञान के सूर्योदय के केंद्र ओंकारेश्वर की चेतना की अनुभूति आज विश्वभर में हो रही है। उन्होंने कहा कि ज्ञान और ध्यान की धरती मध्यप्रदेश ने ऐतिहासिक रूप से धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया है और हर युग में इसके प्रमाण विद्यमान हैं।मुख्यमंत्री डॉ. यादव आचार्य शंकराचार्य जी की जयंती के अवसर पर ओंकारेश्वर स्थित एकात्म धाम में आयोजित पांच दिवसीय प्रकटोत्सव ‘एकात्म पर्व’ के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने भगवान श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण और आदि शंकराचार्य के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महापुरुषों ने भारतीय संस्कृति, मूल्य और आध्यात्मिकता को नई दिशा दी है।मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने आचरण से आदर्श शासन और सामाजिक मूल्यों का मार्ग दिखाया, वहीं भगवान श्रीकृष्ण ने कर्मवाद का संदेश देकर जीवन को कर्मप्रधान बनाया। आदि शंकराचार्य ने अद्वैत दर्शन के माध्यम से भारतीय संस्कृति, धर्म और आध्यात्मिक एकता को सुदृढ़ किया।कार्यक्रम में श्री द्वारका शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती, विवेकानंद केंद्र की उपाध्यक्ष पद्मश्री निवेदिता भिड़े सहित अनेक संत, विद्वान और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। राज्य सरकार के संस्कृति विभाग एवं आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास के तत्वावधान में 17 से 21 अप्रैल तक एकात्म पर्व का आयोजन किया जा रहा है।इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया तथा अद्वैत लोक और अक्षर ब्रह्म प्रदर्शनी का लोकार्पण किया। उन्होंने वैदिक अनुष्ठान में सहभागिता करते हुए ‘वेदांतसिद्धान्तचन्द्रिका विथ उदग्र’ पुस्तक का विमोचन भी किया तथा एकात्म धाम की आधिकारिक वेबसाइट का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में अद्वैत पर आधारित लघु फिल्मों का प्रदर्शन भी किया गया।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार सनातन संस्कृति के सिद्धांतों के अनुरूप समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने पं. दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि एकात्मता का भाव समाज के समग्र विकास का आधार है।

जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती ने कहा कि प्राणी मात्र में परमात्मा का दर्शन ही एकात्मता का मूल है। उन्होंने आत्मबोध और वेदों के ज्ञान को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। वहीं पद्मश्री निवेदिता भिड़े ने कहा कि समस्त सृष्टि में एक ही चेतना विद्यमान है और एकात्मता का व्यवहार ही धर्म का वास्तविक स्वरूप है।कार्यक्रम में बताया गया कि ओंकारेश्वर को ग्लोबल सेंटर ऑफ वननेस के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां अद्वैत लोक संग्रहालय का निर्माण प्रगति पर है तथा विभिन्न सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियां निरंतर संचालित की जा रही हैं।पांच दिवसीय एकात्म पर्व के अंतर्गत वैचारिक सत्र, सांस्कृतिक कार्यक्रम, अद्वैत पर विमर्श और युवाओं के लिए विशेष गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। 21 अप्रैल को आयोजित दीक्षा समारोह में 700 से अधिक युवा ‘शंकर दूत’ के रूप में संकल्प लेंगे।यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक जागरण का माध्यम बनेगा, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय दर्शन और अद्वैत के सिद्धांतों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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