
भोपाल नगर निगम को स्वच्छता सर्वेक्षण वर्ष 2025 में द्वितीय स्थान प्राप्त होने के बावजूद शहर की वास्तविक स्वच्छता स्थिति पर गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। आवेदक ने संबंधित विभाग को पत्र लिखकर बताया है कि शहर के कई स्थानों पर कचरे के ढेर लगे हुए हैं, जिनसे नागरिकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।आवेदक ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि माननीय महापौर के स्थायी आवास के समीप भी अत्यधिक गंदगी एवं कचरे के ढेर मौजूद हैं, जो शर्मनाक स्थिति को दर्शाता है। वर्तमान बरसात के मौसम में डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया जैसी बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है।पत्र में यह आरोप लगाया गया है कि स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए जो प्रतिवेदन भेजा गया है, वह वास्तविक तथ्यों से भिन्न है। आवेदक ने कहा कि:
- झूठी और भ्रामक जानकारी प्रस्तुत कर उच्च स्थान प्राप्त किया गया।
- नगर निगम अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य को हानि पहुंचाई गई, जो भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत दंडनीय है।
- यह कृत्य भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 एवं भारतीय न्याय संहिता की धारा 271 और 272 के अंतर्गत अपराध की श्रेणी में आता है।
आवेदक ने वार्ड अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर शीघ्र कार्यवाही की मांग की है। साथ ही, कचरे के ढेरों के फोटो भी साक्ष्य स्वरूप संलग्न किए हैं और सत्यापन हेतु वीडियो प्रस्तुत करने की पेशकश की है।