गोंडवाना आदिवासी कला केंद्र

पत्रिका समूह के विशेष आयोजन में लोकतंत्र, संस्कृति और मूल्य आधारित पत्रकारिता पर हुआ मंथन,

पत्रिका समूह द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम में विभिन्न गणमान्य अतिथियों ने लोकतंत्र, भारतीय संस्कृति और मूल्य आधारित पत्रकारिता की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पत्रिका समूह की यात्रा की तुलना गंगा की पवित्र धारा से करते हुए कहा कि जैसे गंगा गौमुख से निकलकर विभिन्न धाराओं—अलकनंदा और भागीरथी—से मिलते हुए हरिद्वार, ऋषिकेश, पटना और बनारस होते हुए गंगासागर तक पहुंचती है, उसी प्रकार पत्रिका समूह की यात्रा भी विविध अनुभवों और विस्तार के साथ निरंतर आगे बढ़ती रही है।मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में स्वर्गीय कुलिश जी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की तथा पत्रिका समूह को इस आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने समूह के प्रधान संपादक श्री गुलाबचंद कोठारी के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पत्रकारिता को समाजहित और मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री को स्मृति चिन्ह भी भेंट किया गया। कार्यक्रम में कुलिश जी की दो पुनर्प्रकाशित पुस्तकों—‘मैं देखता चला गया’ और ‘अमेरिका एक विहंगम दृष्टि’—का लोकार्पण भी अतिथियों द्वारा किया गया।लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्यों को समाप्त करने के अनेक प्रयास हुए, लेकिन भारत का लोकतंत्र सदैव मजबूत बना रहा। उन्होंने कहा कि पत्रिका समूह ने अपनी छह दशक की यात्रा में समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज को शासन और प्रशासन तक पहुंचाने का कार्य किया है। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान पत्रकारों और लेखकों की महत्वपूर्ण भूमिका का भी उल्लेख किया।राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र की आधारशिला है और बदलते समय में सरकारों और मीडिया के बीच समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मूल्य आधारित पत्रकारिता ही आने वाली पीढ़ियों को सही दिशा प्रदान कर सकती है। आपातकाल के दौर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय कई समाचार पत्र समूहों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की रक्षा के लिए साहसिक भूमिका निभाई।पत्रिका समूह के प्रधान संपादक श्री गुलाब कोठारी ने शिक्षा में जीवन दर्शन, नैतिक मूल्यों और भारतीय परंपराओं को शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि पश्चिमी प्रभाव के कारण युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से दूर हो रही है, जबकि भारत की समृद्ध परंपराएं आज भी जीवित हैं। नई शिक्षा नीति में आध्यात्मिकता और संस्कारों को शामिल करने की पहल को उन्होंने सकारात्मक कदम बताया।कार्यक्रम में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी ने कहा कि कुलिश जी ने लोकतंत्र के तीनों स्तंभों को उनके दायित्वों का बोध कराया। उन्होंने न्यायपालिका को संविधान का संरक्षक बताते हुए नागरिकों के मूल अधिकारों की रक्षा में इसकी भूमिका को रेखांकित किया।इस अवसर पर पत्रिका समूह के वरिष्ठ पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, पत्रकार और अनेक गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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