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तेहरान पर अमेरिकी-इजरायली एयर स्ट्राइक और वरिष्ठ ईरानी कमांडर व रक्षामंत्री की मौत,

आज सुबह संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के खिलाफ एक संगठित और व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया, जिसे इज़राइल ने “ऑपरेशन रोरिंग लायन” (Operation Lion’s Roar) नाम दिया है और अमेरिकी सशस्त्र बलों ने इसे “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के रूप में पहचान दी है। यह कार्रवाई तेहरान समेत कई प्रमुख शहरों और सैन्य ठिकानों पर की गई, जिसका उद्देश्य ईरान की सैन्य, मिसाइल और नेतृत्व क्षमता को घातक रूप से कमजोर करना बताया जा रहा है।आज सुबह प्रारंभ हुए इन वायु हमलों और मिसाइल स्ट्राइकों में ईरान के वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व को निशाना बनाया गया। रॉयटर्स समेत अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ईरान के रक्षा मंत्री अमीर नासिरज़ादेह और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के प्रभावशाली कमांडर जनरल मोहम्मद पाकपुर दोनों ही इन हमलों में मारे गए हैं। कार्रवाई ईरान की सैन्य शक्ति के शीर्ष नेतृत्व पर सीधे प्रहार करने वाली है और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहरा असर डाल सकती है।ये हमले ऐसे समय में हुए हैं जब अमेरिका और इज़राइल के सामने ईरान की परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को रोकने तथा उसके सैन्य नेटवर्क को बेअसर करने की रणनीतिक प्राथमिकता रही है। दोनों देशों ने इस अभियान को “ऑपरेशन रोरिंग लायन” के तहत संयुक्त रूप से अंजाम दिया, जिसमें वायु सेनाएँ, सटीक मिसाइल प्रक्षेपण और खुफिया जानकारी का व्यापक इस्तेमाल शामिल था।ईरानी राजधानी तेहरान, इस्फहान, कराज, करमानशाह सहित कई स्थानों पर विस्फोटों और भारी संघर्ष की खबरें सामने आई हैं, जिससे पूरे देश में तनाव और भय का माहौल व्याप्त है। ईरान ने अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया है और देश भर में सुरक्षा चेतावनियाँ जारी की हैं। नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने तथा सतर्क रहने के लिए कहा गया है।ईरान की प्रतिक्रिया भी तुरंत आई—तेहरान ने अमेरिकी एवं इजरायली ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करके प्रतिक्रिया की कार्रवाई की है, जिसमें कतर, कुवैत, यूएई तथा बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बताया गया है। इससे स्पष्ट है कि संघर्ष अब एक द्विपक्षीय सैन्य टकराव में बदल चुका है।अंतरराष्ट्रीय राजनयिक स्रोतों के अनुसार, इस संयुक्त अभियान का लक्ष्य न केवल सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना है, बल्कि ईरान के सैन्य नेतृत्व की क्षमताओं को भी कमजोर करना है, ताकि क्षेत्र में उसकी भूमिका और प्रभाव सीमित किया जा सके। इस रणनीतिक दिशा को ईरान की मिसाइल क्षमताओं, परमाणु कार्यक्रम और समर्थक उन्मूलन नेटवर्कों को चुनौती देने का प्रयास माना जा रहा है।इस हमले की भारी राजनीतिक और सुरक्षा परिणाम होने की संभावना है। इज़राइल और अमेरिका ने इसे “आत्मिक सुरक्षा खतरे” के रूप में वर्णित किया है, जबकि ईरान इसे अवैध और आक्रमक कार्रवाई बता रहा है, जो उनके राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन है। इस उग्र कार्रवाई के चलते मध्य पूर्व की स्थिति और अधिक जटिल व अस्थिर होती दिख रही है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और क्षेत्रीय गठबंधनों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

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