नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार पर दिखाई देने लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव बढ़ने के बाद सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। कारोबार के दौरान Brent crude 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया, जिससे दुनिया भर के बाजारों में चिंता बढ़ गई।

तेल की कीमतों में तेजी की बड़ी वजह Strait of Hormuz को लेकर बढ़ी आशंकाएं हैं। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ने से निवेशकों को डर है कि यदि इस रास्ते से तेल की आवाजाही प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के Larak Island पर मिसाइल लॉन्चरों को निशाना बनाया। इसके बाद ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की खबरें सामने आईं। घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में संघर्ष के और फैलने की आशंका को बढ़ा दिया है। इसी वजह से निवेशकों ने तेल की कीमतों में संभावित जोखिम को देखते हुए खरीदारी बढ़ाई।
तेल की कीमतों में इस तेजी का असर केवल ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रहता। कच्चा तेल महंगा होने पर परिवहन, उत्पादन और आयात की लागत बढ़ सकती है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार बढ़ोतरी चिंता का विषय बन सकती है। हालांकि घरेलू ईंधन कीमतों पर इसका सीधा असर कई अन्य आर्थिक और नीतिगत कारकों पर भी निर्भर करता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में आगे तेल की दिशा अब पश्चिम एशिया की स्थिति और Strait of Hormuz से होने वाली तेल आवाजाही पर काफी हद तक निर्भर करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वास्तविक आपूर्ति बाधित होती है तो कीमतों में और तेजी आ सकती है, जबकि सामान्य आपूर्ति बनी रहने पर मौजूदा तेजी कुछ कम भी हो सकती है।
फिलहाल कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। महंगे तेल से महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है और इसका असर शेयर बाजारों तथा मुद्रा बाजारों पर भी दिखाई दे सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान तनाव और तेल की आपूर्ति से जुड़ी खबरों पर दुनिया भर के निवेशकों की नजर बनी रहेगी।