
हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों ने एक बार फिर भारत की सुरक्षा एजेंसियों और रणनीतिक विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में चीन के तीन उच्च-स्तरीय जासूसी जहाजों को हिंद महासागर के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय गश्त करते हुए देखा गया है। इनमें से दो जहाज अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के पास, जबकि तीसरा जहाज मालदीव के आसपास तैनात है। यह सक्रियता ऐसे समय में बढ़ी है, जब भारत इसी क्षेत्र में महत्वपूर्ण मिसाइल परीक्षण की तैयारी कर रहा है।चीन के ये जासूसी जहाज न केवल समुद्र के नीचे के पर्यावरण, सतह और गहराई का 3डी मैप तैयार करने में सक्षम हैं, बल्कि ये पानी के भीतर पनडुब्बियों की नेविगेशन के लिए जरूरी डेटा, समुद्री सतह की सूक्ष्म गतिविधियों और हवा में होने वाली मिसाइल गतिविधियों को भी रिकॉर्ड करने की क्षमता रखते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, इन जहाजों के कारण भारत के रणनीतिक मिसाइल परीक्षण कार्यक्रम को बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। यदि ये जहाज परीक्षण क्षेत्र के नजदीक मौजूद रहते हैं, तो भारत को अपने निर्धारित परीक्षण को टालने तक की स्थिति आ सकती है।भारत ने कुछ दिन पहले ही अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के पास एक महत्वपूर्ण मिसाइल परीक्षण के लिए नोटम (Notice to Airmen) जारी किया था। इस नोटम के अनुसार 25 नवंबर से 27 नवंबर के बीच निर्धारित समुद्री क्षेत्र को नो-फ्लाई ज़ोन घोषित किया गया है। इस परीक्षण क्षेत्र की अधिकतम लंबाई 490 किलोमीटर तक है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि भारत ब्रह्मोस एंटी-शिप क्रूज मिसाइल के एक्सटेंडेड रेंज वेरिएंट का परीक्षण कर सकता है।ब्रह्मोस मिसाइल दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक है, जो समुद्र की सतह के बिल्कुल नजदीक उड़ते हुए दुश्मन के युद्धपोतों को सटीकता से निशाना बनाती है। इसकी ऐसी तकनीक है कि दुश्मन के रडार को इसके आने का पता लगने से पहले ही यह अपने लक्ष्य को भेद देती है। इसकी विस्तारित रेंज भारत की समुद्री मारक क्षमता को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।इस परीक्षण के महत्व और संवेदनशीलता को देखते हुए, क्षेत्र में चीन के तीन जासूसी जहाजों की उपस्थिति सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गई है।
समुद्र में चीन की मौजूदगी—कौन से जहाज कहां?
सूत्रों के अनुसार चीन के ये तीन जहाज वर्तमान में रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्थानों पर तैनात हैं:
- शी यान-6 (Shi Yan 6)
यह जहाज अंडमान द्वीपसमूह के सबसे करीब मौजूद है। हाल ही में यह मलक्का जलडमरूमध्य से होकर हिंद महासागर में प्रवेश किया है। शी यान-6 समुद्र के नीचे के पर्यावरण और ध्वनिक संकेतों का विश्लेषण करने में माहिर है और आमतौर पर इसे समुद्री अनुसंधान के नाम पर भेजा जाता है, लेकिन कई बार यह जासूसी गतिविधियों में शामिल पाया गया है। - शेन ही यी हाओ (Shen Hai Yi Hao)
यह दूसरा जासूसी जहाज अंडमान-निकोबार के दक्षिणी भाग में सक्रिय रूप से ऑपरेट कर रहा है। इसकी क्षमता समुद्र की सतह और नीचे दोनों में निगरानी करने की है। भारतीय परीक्षण क्षेत्र के नजदीक होने के कारण इसकी गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है। - लेनहाई-201 (Lianhai 201)
तीसरा जहाज मालदीव के पास समुद्र का गहन सर्वेक्षण कर रहा है। इसका डेटा भविष्य में चीन की नौसेना को हिंद महासागर में संचालन क्षमता बढ़ाने में मदद करता है। इसकी उपस्थिति से भारत–मालदीव–चीन संबंधों की जटिलता और बढ़ रही है।
हिंद महासागर भारत की सामरिक सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र है। चीन पिछले कुछ वर्षों में लगातार अपने तथाकथित “आइडेंटिफिकेशन एंड ओशन सर्वे” जहाजों के माध्यम से इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये जहाज वैज्ञानिक अनुसंधान के नाम पर भेजे जाते हैं, जबकि असल मकसद भारत की रक्षा गतिविधियों की निगरानी करना होता है।भारत को मिसाइल परीक्षण के समय अत्यंत गोपनीयता और सुरक्षा का पालन करना होता है। यदि परीक्षण क्षेत्र के आसपास कोई विदेशी जहाज मौजूद हो, तो मिसाइल डेटा लीक होने का खतरा रहता है। ऐसे में अगर चीन के ये जहाज उस समय उस क्षेत्र में बने रहते हैं तो भारत सुरक्षा कारणों से परीक्षण को टाल भी सकता है।भारतीय नौसेना लगातार इन जहाजों की गतिविधियों पर निगरानी बनाए हुए है। समुद्री गश्त विमानों, युद्धपोतों और तकनीकी साधनों के माध्यम से इनकी मूवमेंट की वास्तविक समय में मॉनिटरिंग की जा रही है। भारत ने कई बार अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का हवाला देते हुए यह स्पष्ट किया है कि विदेशी जहाजों को भारतीय विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में अनुसंधान कार्य करने के लिए अनुमति लेनी होती है।इस घटना ने एक बार फिर हिंद महासागर में चीन के बढ़ते समुद्री प्रभाव और भारत के समुद्री हितों की सुरक्षा के महत्व को उजागर कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या भारत अपने निर्धारित समय में मिसाइल परीक्षण कर पाता है या सुरक्षा दृष्टि से उसे पुनर्निर्धारित करना पड़ेगा।