
तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन के प्रस्ताव को असद ने सरकार में रहते हुए ठुकरा दिया था, जिसकी उनको भारी कीमत चुकानी पड़ी। एर्दोगन का कहना है कि उन्होंने असद को मिलकर काम करने का एक प्रस्ताव दिया था लेकिन उन्होंने इसका जवाब नहीं दिया। इसके बाद तुर्की के समर्थन वाली विद्रोही ताकतों ने लड़ाई शुरू की और दो हफ्ते के अंदर ही दमिश्क पर कब्जा कर लिया। सीरिया के अनिश्चितता के इस दौर में तुर्की ने अपनी अहमियत जाहिर की है तुर्की में आज के वक्त में करीब 30 लाख सीरियाई शरणार्थी हैं। ये एर्दोगन के लिए एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा है। वही सीरिया से मिलती हुई सीमा की सुरक्षा भी केंद्र में है।
तुर्की में 30 लाख से ज्यादा सीरियाई शरणार्थी हैं और सीरियाई लोगों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत शरणार्थी का दर्जा भी प्राप्त नहीं है। ये सीरिया में राजनीति का मुद्दा बना हुआ है। ऐसे में एर्दोगन इनमें से ज्यादातर लोगों को सीरिया वापस भेजने की कोशिश करेंगे।