
आज संसद में भारतीय राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक विशेष चर्चा आयोजित की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में चर्चा की शुरुआत करते हुए वंदे मातरम के इतिहास, इसकी प्रेरणादायी विरासत और आजादी के आंदोलन में इसके अभूतपूर्व योगदान को श्रद्धापूर्वक रेखांकित किया।प्रधानमंत्री ने कहा कि अंग्रेजों की गुलामी के दौर में जब पूरा देश निराशा और दमन की चपेट में था, उस समय बंकिमचंद्र चटोपाध्याय ने वंदे मातरम की रचना कर राष्ट्र को नई ऊर्जा और उत्साह प्रदान किया। यह गीत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बनकर उभरा और लाखों लोगों के मन में आजादी की लौ जलाई।चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की वाक्पटुता और बांग्ला भाषा के अनेक संदर्भों ने सदन को कई बार भावुक किया और कई बार मुस्कुराने पर मजबूर भी। एक अवसर पर उन्होंने वरिष्ठ तृणमूल सांसद सौगत रॉय से उनकी तबीयत के बारे में पूछते हुए कहा—
“आपकी तबीयत कैसी है?”
उनके इस सवाल पर पूरे सदन में ठहाके गूंज उठे।
इसके बाद प्रधानमंत्री ने सौगत रॉय की ओर देखते हुए हास्यपूर्ण अंदाज़ में कहा—
“आपको तो दादा कह सकता हूं न? या उसमें भी एतराज हो जाएगा…”
प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी ने सदन का वातावरण और भी हल्का कर दिया और सभी दलों के सांसद मुस्कुराते हुए दिखे।संसद में चर्चा इस बात को लेकर भी हुई कि प्रधानमंत्री किसे संबोधित कर रहे थे। हालांकि उनके पिछले भाषणों और बंगाल के नेताओं के साथ सौहार्दपूर्ण संबंधों को देखते हुए माना गया कि उनका इशारा सौगत रॉय की ओर ही था। इससे पहले भी प्रधानमंत्री अधीर रंजन चौधरी सहित बंगाल के कई वरिष्ठ नेताओं से मित्रतापूर्ण शैली में संवाद करते रहे हैं।सत्र के दौरान विपक्षी सदस्यों की कुछ टिप्पणियों पर प्रधानमंत्री ने आभार भी व्यक्त किया और कहा कि वंदे मातरम की विरासत दलों से ऊपर उठकर पूरे देश को जोड़ने वाली है।आज का दिन संसद में ऐतिहासिक भी रहा और सौहार्द व हल्के-फुल्के संवादों के कारण यादगार भी।