
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिख पंथ के चतुर्थ गुरु श्री गुरु रामदास जी के प्रकाश पर्व पर उनके पावन चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित किए और उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कहा कि गुरु रामदास जी सेवा, प्रेम और त्याग के प्रतीक हैं। उनका सम्पूर्ण जीवन समाज को करुणा, समानता और मानव सेवा के उच्च आदर्शों की ओर प्रेरित करता है।मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु रामदास जी ने अपनी शिक्षाओं के माध्यम से समाज को एकता, भाईचारा और त्याग का संदेश दिया। उन्होंने जीवनभर मानवता की सेवा को सर्वोच्च मानते हुए धर्म, सत्य और करुणा का मार्ग दिखाया। गुरु जी का जीवन इस बात का प्रतीक है कि सेवा और प्रेम से ही समाज का वास्तविक कल्याण संभव है।गुरु रामदास जी द्वारा स्थापित लंगर परंपरा आज भी सेवा और समानता का जीवंत उदाहरण है, जो सभी वर्गों और जातियों के बीच भाईचारे को प्रोत्साहित करती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उनकी यह परंपरा मानवता को यह सिखाती है कि जब सभी लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं, तब समाज में ऊँच-नीच, भेदभाव और संकीर्णताओं के लिए कोई स्थान नहीं रह जाता।

डॉ. यादव ने कहा कि गुरु रामदास जी की शिक्षाएँ आज के समय में और भी अधिक प्रासंगिक हो गई हैं। जिस दौर में दुनिया विभाजन और वैमनस्य की चुनौतियों से जूझ रही है, ऐसे में गुरु जी की करुणा, सेवा और समरसता की राह हमें शांति और सहयोग की ओर ले जाती है। उनका दिव्य व्यक्तित्व और प्रेरणा सभी को समाज और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करता रहेगा।मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि गुरु रामदास जी की शिक्षाओं से प्रेरणा लेकर समाज के प्रत्येक वर्ग में भाईचारा, करुणा और सेवा की भावना को और अधिक प्रबल बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि गुरु जी का प्रकाश पर्व हम सभी को अपने जीवन में त्याग, सेवा और प्रेम को अपनाने का अवसर प्रदान करता है।प्रकाश पर्व पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ दीं और कहा कि हम सब मिलकर गुरु रामदास जी की शिक्षाओं को आत्मसात करते हुए एक ऐसे समाज का निर्माण करें, जहाँ समानता, सहयोग और भाईचारे की भावना मजबूत हो।