मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश के सफाई कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर भोपाल में प्रेस वार्ता कर भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के शहरों को स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सफाई कर्मचारी आज खुद आर्थिक तंगी, असुरक्षित रोजगार और शोषण का सामना कर रहे हैं। स्वच्छ भारत अभियान के नाम पर सरकार अपनी उपलब्धियां गिनाती है, लेकिन सफाई कर्मचारियों को सम्मानजनक वेतन, स्थायी रोजगार और कार्यस्थल पर सुरक्षा देने में विफल रही है।सिंघार ने कहा कि प्रदेश में सफाई कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। 3 नवंबर को भोपाल में प्रदर्शन के बाद 4 नवंबर से प्रदेशव्यापी कामबंद हड़ताल की घोषणा भी की गई है। इसके बावजूद सरकार की ओर से उनकी समस्याओं के समाधान के लिए ठोस पहल नजर नहीं आ रही है।उन्होंने सफाई कर्मचारियों की चार प्रमुख मांगों को सामने रखते हुए कहा कि वर्षों से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी और विनियमित कर्मचारियों को नियमित कर सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में न्यूनतम 25 हजार रुपये मासिक वेतन सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही ठेका और आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त कर स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया जाए तथा सेवाकाल के दौरान कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार के पात्र सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति दी जाए।सफाई कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भोपाल में कई कर्मचारियों को 29 दिन काम करने के बाद भी लगभग 9 हजार रुपये ही वेतन मिलता है। वहीं प्रदेश के अन्य नगरीय निकायों में कहीं 7 हजार तो कहीं महज 6 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। इतनी कम आय में कर्मचारियों के लिए घर का किराया, राशन, बच्चों की पढ़ाई और परिवार का इलाज कराना बेहद मुश्किल है।सिंघार ने सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि जून 2023 से जुलाई 2026 के बीच ग्वालियर, रीवा, सतना, इंदौर और उज्जैन में सीवर सफाई के दौरान हुई पांच घटनाओं में आठ लोगों की मौत हुई, जबकि चार कर्मचारी घायल हुए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सीवर सफाई के दौरान लगातार कर्मचारियों की जान जा रही है, तो सरकार उनकी सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं कर पा रही है?उन्होंने कहा कि मैनुअल स्कैवेंजिंग अधिनियम, 2013 में खतरनाक तरीके से सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई पर रोक तथा उल्लंघन करने वालों के लिए दंड का प्रावधान है। वहीं सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सीवर सफाई के दौरान मृत्यु होने पर 30 लाख रुपये मुआवजे का प्रावधान है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि अब तक कितने प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया गया है और कितने मामले लंबित हैं।नियमितीकरण के मामले में भी सिंघार ने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 25 मार्च 2025 को वर्षों से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए व्यापक नीति बनाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद कर्मचारियों को राहत देने के बजाय सरकार अदालत में अपील कर रही है। उन्होंने इस मामले में सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर सफाई कर्मचारियों की मांगों का जल्द निराकरण करने का आग्रह किया है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि कर्मचारियों के नियमितीकरण की समयसीमा कब तय होगी, 25 हजार रुपये न्यूनतम वेतन कब लागू किया जाएगा और ठेका व्यवस्था समाप्त कर उन्हें स्थायी रोजगार कब मिलेगा?अंत में उमंग सिंघार ने कहा कि जो कर्मचारी दिन-रात मेहनत करके शहरों को स्वच्छ रखते हैं, उनके जीवन में भी सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता होनी चाहिए। सफाई कर्मचारी केवल शहरों की स्वच्छता के जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। सरकार को उनकी मांगों को गंभीरता से लेते हुए जल्द निर्णय लेना चाहिए।