
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में एक स्कूल के मैदान में आयोजित हो रही रामलीला के कार्यक्रम को बंद करने के निर्देश दिए गए थे। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा कि रामलीला का आयोजन पहले से तय कार्यक्रम का हिस्सा है और त्योहार की तैयारियां काफी पहले से शुरू हो चुकी हैं, इसलिए इसे रोका नहीं जा सकता।हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस आयोजन को जारी रखने की अनुमति देते हुए कुछ महत्वपूर्ण शर्तें भी जोड़ीं। अदालत ने कहा कि रामलीला के चलते स्कूल के छात्रों की पढ़ाई, खेलकूद या किसी भी गतिविधि में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए। यदि छात्रों को किसी भी प्रकार की परेशानी होती है, तो यह जिला प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि वह तुरंत समाधान सुनिश्चित करे।मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि स्कूल के खेल मैदान मूल रूप से बच्चों के उपयोग के लिए ही होते हैं। इसलिए हाईकोर्ट से अपेक्षा की जाती है कि वह जिला प्रशासन को यह निर्देश दे कि भविष्य में ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए कोई वैकल्पिक स्थल तय किया जाए। इससे दोहरे उद्देश्य पूरे होंगे—एक तरफ पारंपरिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की निरंतरता बनी रहेगी और दूसरी ओर छात्रों को उनके खेल मैदान का पूरा उपयोग मिल सकेगा।ज्ञात हो कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में आदेश पारित कर फिरोजाबाद जिले के एक सरकारी स्कूल के मैदान में चल रही रामलीला को रोकने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट का कहना था कि स्कूल परिसर का प्रयोग केवल शैक्षणिक और खेल गतिविधियों के लिए होना चाहिए, न कि धार्मिक आयोजनों के लिए। इस आदेश को चुनौती देते हुए आयोजकों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था।
सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम राहत से आयोजकों और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। रामलीला कमेटी से जुड़े लोगों का कहना है कि दशकों से यह परंपरा जारी है और स्थानीय समाज इससे गहराई से जुड़ा हुआ है। अदालत के आदेश से अब यह कार्यक्रम बिना किसी रुकावट के संपन्न हो सकेगा।दूसरी ओर, अदालत का यह निर्देश भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि आने वाले समय में प्रशासन को ऐसे वैकल्पिक स्थलों की पहचान करनी होगी जहाँ इस तरह के बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हो सके। इससे स्कूलों के खेल मैदान सिर्फ छात्रों के लिए ही सुरक्षित रहेंगे और साथ ही समाज के धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों को भी मंच मिलेगा।सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय परंपरा और शिक्षा—दोनों के बीच संतुलन बनाने का एक प्रयास माना जा रहा है। जहाँ एक ओर रामलीला जैसे आयोजनों को आस्था और संस्कृति से जुड़ा महत्व दिया गया है, वहीं दूसरी ओर छात्रों के हितों की रक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।