
मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने शहडोल जिले में सीवर लाइन की खुदाई के दौरान मिट्टी धंसने से हुई दर्दनाक दुर्घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। इस दुर्घटना में दो श्रमिक, श्री मुकेश बैगा एवं श्री महिपाल बैगा, मलबे में दब गए, जिनका दुर्भाग्यवश निधन हो गया।उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने इस घटना को अत्यंत हृदय विदारक और पीड़ादायक बताते हुए कहा कि इस दुर्घटना में दो मेहनतकश श्रमिकों का यूँ असमय जाना पूरे समाज के लिए एक गहरा आघात है। उन्होंने दिवंगत आत्माओं को ईश्वर से अपने श्रीचरणों में स्थान देने और शोकाकुल परिजनों को इस वज्र समान पीड़ा को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
पीड़ित परिवारों को शीघ्र सहायता के निर्देश
श्री शुक्ल ने शहडोल जिला प्रशासन को इस दुर्घटना से प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक एवं आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार श्रमिकों और उनके परिवारों के साथ हर परिस्थिति में खड़ी है और इस कठिन समय में सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
सुरक्षा मानकों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश
उप मुख्यमंत्री ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए संबंधित विभागों को निर्माण और खुदाई कार्यों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए तकनीकी सावधानियां व निगरानी व्यवस्था और मजबूत की जाए।
दुर्घटना की जांच के आदेश
श्री शुक्ल ने घटना की पूरी जांच कर दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने और जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही सामने आने पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
सरकार श्रमिकों के साथ खड़ी है
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार श्रमिकों और मेहनतकश वर्ग के कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा,
“श्रमिक हमारे विकास यात्रा के वास्तविक साथी हैं। उनका सम्मान, सुरक्षा और कल्याण हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। सरकार श्रमिकों के परिवारों को हर संभव मदद और सुरक्षा उपलब्ध कराएगी।”
श्री शुक्ल ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस कठिन समय में दिवंगत श्रमिकों के परिवारों को सांत्वना और सहयोग प्रदान करें। उन्होंने कहा कि समाज की एकजुटता और मानवीय संवेदनाएं ही इस तरह के दुखद समय में परिवारों को सहारा दे सकती हैं।
यह दुर्घटना न केवल एक प्रशासनिक चुनौती है, बल्कि हमें यह भी याद दिलाती है कि विकास कार्यों के साथ-साथ मानव जीवन की सुरक्षा और श्रमजीवी वर्ग की देखभाल सर्वोपरि होनी चाहिए।