सम्राट विक्रमादित्य के सम्मान में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा विविध पहलें एवं महानाट्य का सफल आयोजन

भारतीय इतिहास में अनेक प्रतापी शासकों ने अपने शासन, न्याय, शौर्य और जनकल्याण के माध्यम से अमिट छाप छोड़ी है। उन्हीं में से एक महान शासक रहे सम्राट विक्रमादित्य, जिन्होंने न्यायप्रियता, पराक्रम और कालगणना के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान दिया। उनके नाम से आरंभ हुआ विक्रम संवत आज भी भारतीय सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है।सम्राट विक्रमादित्य की गौरवशाली परंपरा को पुनः प्रतिष्ठित करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश सरकार द्वारा हाल के वर्षों में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में इन प्रयासों ने सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में नई ऊर्जा का संचार किया है।राज्य सरकार ने कुछ वर्ष पूर्व वार्षिक विक्रमोत्सव की शुरुआत की, जो अब प्रदेश का प्रमुख सांस्कृतिक आयोजन बन चुका है। इसके साथ ही उज्जैन स्थित विक्रम विश्वविद्यालय का नाम परिवर्तित कर सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय रखा गया है, जिससे इस संस्थान का गौरव और ऐतिहासिक महत्व और अधिक सुदृढ़ हुआ है।सम्राट विक्रमादित्य के व्यक्तित्व और कृतित्व को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सरकार ने कई प्रतीकात्मक पहलें की हैं। मुख्यमंत्री निवास के मुख्य द्वार पर विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की स्थापना की गई है, जो भारतीय कालगणना और वैज्ञानिक परंपरा के प्रति सम्मान का प्रतीक है। राज्य सरकार के शासकीय कैलेंडर में अब विक्रम संवत का भी उल्लेख किया जा रहा है, जिससे यह भारतीय समय परंपरा का अभिन्न हिस्सा बन गया है।इसी श्रृंखला में, सम्राट विक्रमादित्य के जीवन और कार्यों पर आधारित महानाट्य “सम्राट विक्रमादित्य” का मंचन अप्रैल 2025 में नई दिल्ली में किया गया। यह नाट्य आयोजन मध्यप्रदेश सरकार की सांस्कृतिक दृष्टि और राष्ट्रव्यापी संदेश का प्रतीक माना जा रहा है। राजधानी भोपाल में मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर भी नागरिक इस महानाट्य को देख सकेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस पहल के माध्यम से भारतीय रंगमंच की महत्ता को पुनः राष्ट्रीय पटल पर लाने का प्रयास किया है। आज के डिजिटल युग में जहाँ मनोरंजन के अनेक आधुनिक माध्यम उपलब्ध हैं, वहीं भारतीय नाट्यशास्त्र और पारंपरिक रंगकला को पुनर्जीवित करने की दिशा में यह कदम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।नई दिल्ली में तीन दिन तक लगातार चले इस मंचन में अभिनय, प्रकाश संयोजन, संगीत, वेशभूषा और मंच-प्रस्तुति का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस प्रस्तुति ने युवा पीढ़ी को भारतीय इतिहास के आदर्श शासकों से परिचित करवाने का सार्थक प्रयास किया है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि “सम्राट विक्रमादित्य भारतीय आदर्श शासन, पराक्रम और सांस्कृतिक समृद्धि के प्रतीक हैं। हमें अपने युवाओं को इन आदर्श व्यक्तित्वों के बारे में जानकारी देकर प्रेरित करना चाहिए।”मध्यप्रदेश से यह संदेश पूरे राष्ट्र में प्रसारित हुआ है कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और नाट्य परंपरा को आधुनिक मंच पर प्रस्तुत कर नई पीढ़ी तक पहुँचाया जा सकता है। यह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय आत्मगौरव की पुनर्स्थापना का प्रतीक है।

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