विजयवाड़ा। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार देर शाम आंध्र प्रदेश में आयोजित विजयवाड़ा उत्सव में सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय संस्कृति, पारंपरिक कलाओं और लोक परंपराओं को देश की पहचान बताते हुए कहा कि हमारी सांस्कृतिक विरासत जीवन में उत्साह, उमंग और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।विजयवाड़ा उत्सव में ‘दक्षिण का वैभव’ थीम के अंतर्गत विभिन्न कलाकार समूहों ने आकर्षक सांस्कृतिक नृत्यों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश सरकार और पर्यटन विभाग की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आत्मीय स्वागत किया गया। उत्सव में बड़ी संख्या में कलाकार, श्रद्धालु और नागरिक शामिल हुए।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मां कनक दुर्गा और भगवान मल्लिकार्जुन स्वामी के चरणों में नमन करते हुए आंध्र प्रदेश के नागरिकों को विजयदशमी पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि विजयवाड़ा उत्सव का वैभव लगातार बढ़ रहा है और इस आयोजन के माध्यम से दक्षिण भारत की समृद्ध संस्कृति एवं परंपराओं को देशभर में पहचान मिल रही है। उन्होंने उत्सव में बारिश की बूंदों को भी आनंद और उमंग बढ़ाने वाला बताया।मुख्यमंत्री ने कहा कि कृष्णा नदी के किनारे बसा विजयवाड़ा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व का क्षेत्र है। यहां आयोजित उत्सव में लगभग 4 से 5 हजार कलाकार विभिन्न सांस्कृतिक नृत्यों और कलाओं के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने भव्य आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई भी दी।डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश और आंध्र प्रदेश के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों राज्यों की संस्कृति, परंपराएं और ऐतिहासिक विरासत देश की विविधता को समृद्ध करती हैं। उन्होंने कोहिनूर हीरे का जिक्र करते हुए कहा कि भारत सरकार इसे वापस लाने के लिए प्रयास कर रही है। साथ ही उन्होंने विजयवाड़ा के प्रसिद्ध आम बाजार की भी सराहना की।इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आंध्र प्रदेश के नागरिकों को मध्यप्रदेश आने का निमंत्रण दिया। उन्होंने उज्जैन में बाबा महाकाल और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के साथ ही प्रदेश के समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों और वन्यजीव संपदा को देखने का आग्रह किया। उन्होंने मध्यप्रदेश में चीतों के पुनर्स्थापन का उल्लेख करते हुए प्रदेश की वन्यजीव विविधता से भी लोगों को परिचित होने के लिए आमंत्रित किया।कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विजयवाड़ा उत्सव की विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया। आयोजन में आंध्र प्रदेश के अनेक जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।विजयवाड़ा उत्सव ने सांस्कृतिक एकता, पारंपरिक कलाओं और विभिन्न राज्यों के बीच आपसी सहयोग की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया।