
भारत द्वारा संचालित ईरान के चाबहार बंदरगाह पर रूस ने रणनीतिक रुचि दिखाई है। रूस ने चाबहार को दक्षिण एशिया का एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार बताते हुए इसे यूरोप, मध्य एशिया, दक्षिण और पूर्वी एशिया को जोड़ने वाला प्रमुख केंद्र माना है। इसी क्रम में रूस ने ईरान के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान रणनीतिक रूप से अहम नॉर्थ–साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) में चाबहार बंदरगाह को शामिल करने का निर्णय लिया है।इस फैसले से ईरान को सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है, क्योंकि वह इस कॉरिडोर में जमीनी और समुद्री—दोनों मार्गों से अहम योगदान देगा। रूस की योजना INSTC के माध्यम से भारत को रूस के रास्ते यूरोप से जोड़ने की है, जिससे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नई गति मिलेगी।, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी अली लारीजानी और रूस के ट्रांसपोर्ट उप प्रधानमंत्री विटाली सवेलीव के बीच तेहरान में उच्च स्तरीय बैठक हुई। इस दौरान नॉर्थ–साउथ कॉरिडोर के कार्यान्वयन की प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दिया गया।यह बैठक दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के बीच हुए उच्चतम स्तर के समझौतों के बाद आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य परियोजना से जुड़ी मौजूदा बाधाओं को दूर कर इसे ऑपरेशनल चरण में लाना है। अली लारीजानी ने बताया कि राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के निर्देशानुसार कॉरिडोर मार्ग से संबंधित सभी भूमि का अधिग्रहण वर्ष के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा, ताकि परियोजना बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सके।
विटाली सवेलीव ने ईरान के इस निर्णायक रुख का स्वागत किया और परियोजना को तेज़ी से आगे बढ़ाने तथा ऑपरेशनल प्रक्रिया शुरू करने के लिए मॉस्को की पूर्ण तत्परता की पुष्टि की। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि नॉर्थ–साउथ कॉरिडोर ईरान–रूस के बीच दीर्घकालिक सहयोग को मजबूत करने और स्वतंत्र क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मार्ग स्थापित करने की साझा रणनीति का अहम हिस्सा है।