विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की दिशा में हर संभव मदद करने के लिए तैयार है। यूक्रेन की राजधानी कीव में गुरुवार को यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ द्विपक्षीय बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में जयशंकर ने कहा कि यदि भारत किसी भी तरह से शांति स्थापित करने में योगदान दे सकता है, तो वह इसके लिए तैयार है।जयशंकर ने कहा, “अगर भारत किसी भी तरह से मदद कर सकता है, तो हम इसके लिए तैयार हैं।” उनके इस बयान को रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष के समाधान के लिए भारत की संवाद और कूटनीति पर आधारित नीति के तौर पर देखा जा रहा है।बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के अलावा क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की। बातचीत में ब्लैक सी (काला सागर) में कमर्शियल शिपिंग पर हो रहे हमलों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। हाल के घटनाक्रमों में भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर भारत की चिंता बढ़ी है।यूक्रेन यात्रा का प्रमुख उद्देश्यविदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर की यूक्रेन यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना तथा क्षेत्रीय घटनाक्रमों और आपसी हित से जुड़े मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करना है।इस दौरान जयशंकर अपने यूक्रेनी समकक्ष एंड्री सिबिहा के साथ-साथ पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की के साथ भी बातचीत करेंगे।भारत लगातार रूस-यूक्रेन संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से किए जाने की वकालत करता रहा है। नई दिल्ली ने युद्ध के कारण प्रभावित आम नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है।पीएम मोदी पहले भी कर चुके हैं शांति की अपीलप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए लगातार बातचीत और कूटनीति पर जोर देते रहे हैं। अगस्त 2024 में अपनी यूक्रेन यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मुलाकात की थी और कहा था कि रूस और यूक्रेन को युद्ध खत्म करने के लिए बिना समय गंवाए बातचीत की मेज पर आना चाहिए।वहीं, इसी सप्ताह बिश्केक में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई मुलाकात के दौरान भी प्रधानमंत्री मोदी ने शांति और संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया।विदेश मंत्री जयशंकर का ताजा बयान ऐसे समय में आया है, जब भारत रूस और यूक्रेन दोनों के साथ अपने संबंधों को बनाए रखते हुए युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में अपनी भूमिका को स्पष्ट कर रहा है।भारत का संदेश स्पष्ट है—युद्ध का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए तलाशा जाना चाहिए।